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CM के पास पहुंचे 'ट्रिपल तलाक' के 6 ऐसे मामले, बोलना ही पड़ा योगी को

Thu, 20 Apr 2017 01:47 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
इस समय देश में तीन तलाक (ट्रिपल तलाक) पर लंबी चौड़ी बहस चल रही है। कोई इसके पक्ष में बोल रहा है तो कोई इसके विरोध में। इन सबके बीच कई मुस्लिम महिलाएं 'योगी दरबार' में फरियाद लेकर पहुंची है। तो आइए जानते हैं योगी दरबार में कौन-कौन से बड़े तलाक के मामले पहुंचे हैं...    


 
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कानपुर की आलिया सिद्दीकी को स्पीड पोस्ट से भेजा तीन तलाक, योगी से लगाई न्याय की गुहार
तीन तलाक के ये मामले पहुंचे योगी दरबार   स्पीड पोस्ट से तलाक  कानपुर की आलिया सिद्दीकी ने नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को ट्वीट कर न्याय की गुहार लगाई है। जिसमें लिखा, “सर, मेरे हसबैंड एक गवर्नमेंट इम्प्लॉई हैं। उन्होंने दो शादियां कर रखी हैं, कृपया मदद करें।”
“नासिर खान मेरे पति का नाम है। वो इस समय बिजनौर में सहायक श्रम आयुक्त हैं।”
“मेरे पति ने स्पीड पोस्ट के जरिए एक लेटर में 3 तलाक लिखकर भेजा है। आप मिलने का समय दें…गिव मी जस्टिस।”

 
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आशिया को फोन पर पति ने दिया तलाक, उजड़ी जिंदगी
फोन पर तलाक  तीन शब्दों ने बांदा की रहने वाली आशिया की जिंदगी को जहन्नुम बना दिया। एक झटके सबकुछ खत्म हो गया। तलाक का दंश झेल रही आशिय़ा ने योगी सरकार से इंसाफ की गुहार लगाई है। आशिया का पति से झगड़ा हो गया था। लगा कुछ दिनों में पति का फोन आएगा और वो उसे मना लेंगे। फोन तो आया, लेकिन मनाने के लिए नहीं बल्कि तलाक तलाक तलाक कहने के लिए।

 

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शगुफ्ता शाह को चिट्ठी से मिला तीन तलाक
चिट्ठी से तलाक   सहारनपुर के थाना नानौता के अन्तर्गत मोहल्ला कानूनगोयान निवासी शगुफ्ता नामक महिला ने प्रधामनंत्री और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर कहा कि उसका निकाह पांच वर्ष पूर्व गंगोह के बुढ्ढाखेडा निवासी शमशाद के साथ हुआ था। इस बीच शगुफ्ता ने दो बेटियों को जन्म दिया था जिससे उसके ससुराल वाले नाराज थे। इसके बाद जब वह तीन माह की गर्भवती हुई तो उसके ससुराल वालों ने लड़की होने के डर से गर्भ गिरवाना चाहा। शगुफ्ता ने जब इसका विरोध किया तो पति ओर ससुरालियों ने उसके साथ मारपीट की और पति ने तीन बार तलाक तलाक तलाक कहकर उसे घर से निकाल दिया और उसके पेट पर लात मारकर उसका गर्भ गिराने का प्रयास भी किया।







 
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डेमो
थाने मे तलाक  तीन तलाक मामले को लेकर मुरादनगर की एक महिला ने थाने में तीन बार तलाक बोलकर अपने पति को तलाक दे दिया। इस पर पति ने शरियत का हवाला देते तलाक अस्विकार कर दिया और धर्मगुरुओं से सलाह लेने को कह दिया। पीड़िता का कहना है कि उसका पति नशे में रोज उसको बुरी तरह पीटता था। इसलिए वह उससे छुटकारा चाहती है।

 
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नरगिस को पति ने बोलकर दिया तलाक
बोलकल तलाक  पति द्वारा तीन माह पूर्व पत्नी को बोला तलाक का मामला कोतवाली थाने में गूंजा। महिला को लेकर भाजपा नेता सीओ कोतवाली से मिले। आरोप लगाया कि पहले पति ने तलाक दिया और अब पुलिस से साठगांठ कर साले और उनके बेटे पर फर्जी केस दर्ज करा दिया। सीओ ने दोनों को हिरासत से छुड़वाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन दिया है। 

पीड़िता का नाम नरगिस है। उसकी शादी 11 साल पहले नाजिम उर्फ काले निवासी श्यामनगर लिसाड़ी गेट से हुई थी। तीन महीने पहले नाजिम ने नरगिस को तलाक तलाक तलाक कहकर घर से निकाल दिया था। नरगिस अपने तीन बच्चों को लेकर मायके में रह रही है। 

 
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व्हाट्स एप पर तलाक  रिश्तों को तोड़ने में नई तकनीक और पुरानी रिवायतों ने आग में घी का काम किया है। बस एक मैसेज किया और जीवनभर का साथ एक झटके में खत्म। ऐसा ही कुछ हुआ हीना और महरीन के साथ..दोनों हैदराबाद में रहती हैं। इन देवरानी और जेठानी को व्हाट्सएप पर तलाक मिला। इनके पति अमेरिका में रहते हैं। व्हाट्सएप पर मिले तलाक को दोनों ने मानने से जब इंकार किया तो तो इनके सास-ससुर ने मारपीट कर दोनों को घर से निकाल दिया। 

जहां ये सारे मामले सामने आए हैं तो वहीं ऑल इंडिया मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार को ये तय कर लिया अब से गलत तरीके से तलाक देने वालों का सोशल बायकॉट किया जाएगा। बता दें बोर्ड की स्थापना 1972 में हुई थी तब से पहली बार इतना बड़ा फैसला लिया गया है। इस बोर्ड की बैठक में इस मसले पर बहुत जरूरी सवाल सामने आए। जिनमें तलाक क्या होता है, ट्रिपल तलाक पर विवाद क्यों, तलाक मामले पर महिलाओं को क्या हक जैसे सवाल उठे। यदि आप भी इन सवालों के जवाब जानना चाहते हैं तो अगली स्लाइड में अवश्य पढ़ें...  

 

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ये है बड़े सवाल आए सामने...

ट्रिपल तलाक होता क्या है?
ऑल इंडिया मुस्ल‍िम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है तीन स्टेप में मुस्लिम मजहब में तलाक होता है। जिसमें अगर मियां-बीवी में नहीं बन रही है तो पहले महीने में पहला तलाक, लेकिन इससे पहले आपस में बात करनी चाहिए। अगर इसके बाद भी समझौता नहीं हुआ तो दुसरे महीने में दूसरा तलाक दे सकते हैं, लेकिन पहले परिवार वालों को दोनों पक्षों को समझाना चाहिए। इसके बाद भी बात न बने तो तीसरा तलाक देकर सम्बन्ध ख़त्म कर सकते हैं।

 

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ट्रिपल तलाक पर विवाद क्यों है?
AIMPLB के सेक्रेटरी जफ़रयाब जिलानी बताते हैं कि जब पुरुष गुस्से में, नशे में या फिर बिना तलाक की नियत से भी एक साथ 3 बार तलाक बोल दे, तो उसे गुनाह माना जाता है। लेकिन इसके बावजूद तलाक मान लिया जाता है। इसी मुद्दे पर कुछ संस्थाएं इसका विरोध कर रही हैं।

 

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तलाक मामले पर महिलाओं को क्या हक़ है?
एआईएमपीएलबी की महिला मेंबर डॉ असमां जेहरा कहती है कि महिलाओं को तलाक मामले में 2 अधिकार दिए गए हैं। इसमें 'खुला' और 'फस्ख-ए-निकाह' है। 'खुला' में महिला अगर अपने पति के साथ नहीं रहना चाहती है तो वह दारुल क़ज़ा (शहर काजी की कोर्ट) में अपील कर सकती है। इसमें उलेमा पति को बुलाता है और उसकी राय भी पूछता है। इसके बाद अपना फैसला सुनाता है। जबकि 'फस्ख-ए-निकाह' में भी महिला पति के साथ नहीं रहना चाहती है तो फिर वह दारुल-क़ज़ा जा सकती है। वहां पर पति को बुलाया जाता है। अगर वह नहीं आता है तो उलेमा महिला के पक्ष में वन साइडेड फैसला सूना सकता है।

 

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ट्रिपल तलाक को लेकर जो फैसले लिए गए हैं उसमें नया क्या है?
जफ़रयाब जिलानी ने बताया कि 1972 में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना हुई है। जिसके 45 साल बाद पहली बार ऐसा फैसला लिया गया है कि ट्रिपल तलाक के गलत यूज पर उस व्यक्ति का सोशल बायकॉट किया जाए। अभी तक हम गलत तरह से ट्रिपल तलाक देने वालों के खिलाफ इन्टरनल ताकीद तो जारी करते थे, लेकिन वह नीचे तक नहीं जाता था। अबकी बार हमने बाकायदा कोड ऑफ़ कंडक्ट जारी किया है। जो आम आदमी तक भी बाकायदा मस्जिदों में नमाज के दौरान पढ़ कर बताया जाएगा।
 
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व्हाट्सएप्प, पोस्टकार्ड, ई-मेल या कुरियर के जरिये दिया गया तलाक भी मान्य होगा?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव वली रहमानी ने बताया कि अगर शरियत के हिसाब से व्हाट्सएप्प, पोस्टकार्ड, कुरियर से भी तलाक भेजा गया है तो वह भी मान्य होगा। बोर्ड का मानना है कि जिस तरह से शादी के लिए पोस्टकार्ड से दावतनामा भेजा जाता है और हम उसे मानते हैं। उसी तरह से अगर कोई किसी माध्यम का प्रयोग कर तलाक देता है तो वह भी मान्य होगा।
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