भइया मड़ौली किधर है, यह पूछते हुए गांव आने वाले लोगों कस्रया कम नहीं हो रही है। वह यहां अपने किसी रिश्तेदार के घर नहीं, बल्कि उस घटनास्थल को देखने आ रहे हैं। जहां मां-बेटी जिंदा जल गईं। घर की जगह सिर्फ राख का ढेर पड़ा है।
रूरा के मड़ौली गांव में जिंदा जलकर मरी मां और बेटी के मामले ने तूल पकड़ा, तो लोगों में उस जगह को देखने की उत्सुकता रही। घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद दोनों शवों का अंतिम संस्कार तो कर दिया गया। लेकिन जिस घर के लिए दोनों जलकर मर गईं.. उस जगह अब सिर्फ राख बचा है।
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kanpur fire case
- फोटो : अमर उजाला
घटनास्थल की स्थति अधिकारियों की बर्बरता को बयां कर रही है। सोमवार से लेकर अभी तक लोगों को यहां आने का सिलसिला थम नहीं रहा है। बुधवार दोपहर अकबरपुर कस्बा निवासी राहुल सिंह मड़ौली गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि हमारा कोई रिश्तेदार नहीं रहता।
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मीडिया के माध्यम से जानकारी हुई, तो पूछते हुए घटनास्थल देखने पहुंच गए। वहां लोगों से बातचीत में पता चला कि प्रशासन ने मां और बेटी को जिंदा जला दिया। यह बहुत निंदनीय है। इसी तरह मड़ौली गांव से दो किमी दूर पतारा गांव के अनिल कुमार घटनास्थल पर पहुंचे।
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आगजनी की आशंका के चलते दमकल कर्मी तैनात
प्रमिला और उसकी बेटी नेहा की मौत के तीसरे दिन दमकल की गाड़ी और चार पुलिसकर्मी को तैनात कर दिया गया, ताकि अगर आगजनी की कोई घटना होती है, तो तुरंत कार्रवाई हो सके।
एक किमी दूर से लाया जा रहा जानवरों के लिए पानी
मड़ौली गांव में प्रमिला और उसकी बेटी नेहा की मौत के बाद से घटनास्थल से सारे लोग गांव के अंदर बने मकान में रुके हुए हैं। जबकि गाएं वहीं घटनास्थल पर ही बंधी हैं। उन्हें पानी और चारा पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पा रहा है। सोमवार को एक ग्रामीण ने गायों को प्यासा देखा, तो एक किमी दूर से पानी भरकर गायों को पिलाया।