मनीष गुप्ता हत्याकांड में एसआईटी की भूमिका केवल विवेचना तक ही सीमित रही है। बाकी एसआईटी और गिरफ्तारी के लिए कानपुर से भेजी गईं छह टीमें केवल खाक छान रही हैं। अभी तक एक भी आरोपी की गिरफ्तारी न एसआईटी कर सकी और न ही कानपुर की टीमों ने सफलता पाई। चारों आरोपियों की गिरफ्तारी गोरखपुर पुलिस ने ही की। ऐसे में सवाल उठता है कि जो लक्ष्य गिरफ्तारी का कानपुर की टीमों को दिया गया था उसका क्या हुआ? टीमें केवल खानापूरी कर रहे हैं। यह बड़ी नाकामी है। 27 सितंबर की रात मनीष की हत्या हुई थी। दो अक्तूबर को एसआईटी कानपुर से गोरखपुर पहुंच गई थी। तब से एसआईटी वहीं डेरा डाले हैं। विवेचना जारी है। उसके बाद पुलिस कमिश्नर ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छह सब इंस्पेक्टरों के नेतृत्व में छह टीमें गोरखपुर रवाना की थीं।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
उनको 48 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी का लक्ष्य दिया गया था। वक्त बीत गया लेकिन नाकामी इस कदर रही कि एक भी आरोपी को यह टीमें गिरफ्तार नहीं कर सकीं। दो दिन पहले गोरखपुर पुलिस ने मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह व दरोगा अक्षय मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहीं अब मंगलवार को गोरखपुर पुलिस ने ही दो अन्य आरोपी दरोगा राहुल दुबे व सिपाही प्रशांत को गिरफ्तार किया। मामले में दो अन्य पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी बाकी है।
अचानक गोरखपुर पुलिस अच्छी कैसी हो गई
तीन दिन के भीतर गोरखपुर में चार आरोपियों को गिरफ्तार हो चुकी है। अफसर दावा कर रहे हैं कि बाकी के दो हत्यारोपी पुलिसकर्मियों की भी जल्द से जल्द गिरफ्तारी होगी। गोरखपुर पुलिस की इस सक्रियता को देखकर मीनाक्षी गुप्ता ने कई सवाल उठाए हैं।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड।
- फोटो : अमर उजाला।
उनका कहना है कि अचानक गोरखपुर पुलिस इतनी अच्छी कैसे हो गई। जहां की पुलिस ने मेरे पति को मार दिया। अफसरों ने एफआईआर न दर्ज कराने का दबाव बनाया। अब अचानक वह सक्रिय होकर आरोपियों की गिरफ्तारी कर रहे हैं।
मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपी इंस्पेक्टर व दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
ऐसा कैसे हो रहा है। मीनाक्षी ने कहा कि कानपुर पुलिस एक भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं कर सकी। मीनाक्षी का कहना है कि उनको लगता है कि गोरखपुर पुलिस सांठगांठ कर गिरफ्तारी कर रही है।