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कुमार विश्वास ने गुनगुनाया 'मैं अपनी गीत-गजलों से उसे पैगाम करता हूं' तो झूम उठे कनपुरिए

Sun, 26 Jan 2020 12:54 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कविता पाठ करते हुए डॉ. कुमार विश्वास - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर कैंट स्थित कानपुर क्लब में आयोजित लाइव शो में मशहूर कवि कुमार विश्वास ने गजब का समा बांधा। कुमार विश्वास ने अपनी रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बीचबीच राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर चुटकियां लेकर श्रोताओं को खूब हंसाया भी और तालियां बटोरीं।
 
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डॉ. कुमार विश्वास - फोटो : अमर उजाला
श्रोता उनकी रचनाओं को सुन कुछ देर के लिए मंत्रमुग्ध चुप रहते और फिर तालियों का शोर पूरे माहौल में गूंज उठता। जेसीआई कानपुर और कानपुर क्लब के सहयोग से कुमार विश्वास लाइव शो का आयोजन किया। कुमार विश्वास के अलावा मंच पर मौजूद दूसरे कवियों ने भी अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही बटोरी। सबसे बाद में मंच पर आए कुमार विश्वास ने मैं अपनी गीत-गजलों से उसे पैगाम करता हूं, उसी की दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूं... से अपने कविता पाठ की शुरुआत की।
 
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डॉ. कुमार विश्वास - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुजरी है, हमारी सारी चालाकी वहीं से खोकर गुजरी है..., हवा का काम है चलना, दीये का काम है जलना, वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं..., कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है..., जो दो दिल एक करता है, असली प्यार होता है, सनम को ही खुदा समझें, वही स्वीकार होता है..., मुझे वो मारकर खुश है कि सारा राज उस पर है, यकीनन कल है मेरा आज बेशक आज उसका है..., पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तौलो, ये संबंधों की तुरपाई है इसे षड्यंत्रों से मत खोलो..., इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, बिना कथानक कहानी का क्या फायदा... जैसे गीतों से श्रोताओं को देररात तक मुग्ध करते रहे।

 

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मुमताज नसीम - फोटो : अमर उजाला
इन कवियों ने भी बांधा समा
कुमार विश्वास के मंच पर आने से पहले कवि हेमंत पांडेय ने एक रात में सोचा ही था, सपने में खोजा ही था... सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। अलीगढ़ से आईं मुमताज नसीम ने आज प्यार कर लिया हमने, खुद को बीमार कर लिया हमने..., प्यार की खुशबुओं का समंदर हूं मैं, मुस्कराता हुआ शोख मंजर हूं मैं... पर उन्होंने लोगों ने वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम में कवि विशाल शुक्ला उर्फ अक्खड़ गोंडवी ने अपनी रचना सुनाकर श्रोताओं का मनोरंजन किया। उन्होंने अपनी रचना आइना हूं मैं झूठ कुछ कह नहीं सकता, सच कहूं कि रहनुमा सह नहीं सकता... प्रस्तुत की। कार्यक्रम में कानपुर क्लब और जेसीआई कानपुर के सदस्यों को निशुल्क प्रवेश दिया गया। इस मौके पर जेसीआई के अध्यक्ष अमित गोयनका, अमित जैन तथा अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

 
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कवि हेमंत पांडेय - फोटो : अमर उजाला
कानपुर की तारीफ की
कविता पाठ शुरू करने से पहले कुमार विश्वास ने कानपुर की तारीफ में कसीदे पढ़े। कहा कि कानपुर, वाराणसी और इलाहाबाद के लोगों के पास इतिहास बहुत है। यहां की गलियां इसकी गवाही देती हैं। कानपुर ने गणेश शंकर विद्यार्थी जैसी शख्सियत देश को दी है। यहां की गलियों से चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी होकर निकले हैं। कानपुर की मशहूर कहावत मंडी खुली बजाजा बंद, झाड़े रहो कलक्टरगंज का जिक्र कर चुटकी भी ली।
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