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कभी मां सीता ने यहां गुुजारा था अपना 'अनमोल समय', लव-कुश के जन्म की ये अनकही बातें नहीं जानते होंगे

Mon, 03 Sep 2018 06:41 PM IST
प्रतीक मिश्रा, कानपुर
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लव-कुश जन्मभूमि मंदिर

लव-कुश के जन्म से लेकर मां सीता का पाताल लोक में जाना यह हमेशा से एक रहस्य बना हुआ है। लेकिन यूपी के कानपुर में एक ऐसी जगह है जो इन सभी सवालों के जवाब के साथ-साथ सबूत भी दे रही है। अब इन सबूतों में कितनी सच्चाई है यह बताने वाला तो कोई नहीं है लेकिन लोगों की आस्था इस जगह पर सालों से बनी हुई है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कानपुर की इस जगह से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों के बारे मेंं...


आगे की स्लाइड में पढ़ें- इस मंदिर के बारे में...

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लव-कुश जन्म स्थल

कानपुर से 17 किलोमीटर दूर बिठूर में बना महर्षि वाल्मीकि आश्रम लव-कुश की जन्म स्थली के नाम से जाना जाता है। यहां हर दिन लोग हजारों की संख्या में दर्शन करने आते हैं। केवल शहर के ही नहीं बल्कि कानपुर आने वाले सैलानी भी यहां दर्शन के लिए आते हैं।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें- आठ लाख साल पहले यहां आई थीं सीता...

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वाल्मीकि आश्रम बिठूर

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि 8 लाख साल पहले माता सीता बिठूर आई थीं और यहीं पर लव-कुश का जन्म भी हुआ था। लव-कुश ने इसी स्थान से शिक्षा प्राप्त की थी। वहीं राम जानकी मंदिर में लव-कुश के बाण आज भी रखे हुए हैं। गंगा नदी के किनारे पर बसे इस स्थान पर एक ओर सीता रसोई भी बनी हुई है। यहीं पर मां सीता भोजन बनाया करती थीं। उस समय उपयोग किए गए बर्तन भी सीता रसोई में मौजूद हैं।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहीं लव-कुश ने सीखा बाण चलाना...

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बिठूर

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि लव-कुश ने यहीं पर बाण आदि चलाना सीखा और यहीं वह भोर में गंगा में स्नान करने जाते थे। यहीं पर उन्होंने घुड़सवारी आदि भी सीखा।

 

आगे स्लाइड में पढ़ें- यहीं पकड़ा गया था अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा...

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बिठूर में सीता रसोई

भगवान श्री राम ने जब अश्वमेघ यज्ञ कराया था, तो कोई भी राजा उनके घोड़े को नहीं पकड़ पाया था। वाल्मीकि रामायण में उल्लेख है कि जब वो घोड़ा बिठूर पहुंचा तो लव-कुश ने उसे बांध लिया था। जब राम भक्त हनुमान उस घोड़े को छुड़ाने आए तो लव-कुश ने उन्हें भी परास्त कर बंधक बना लिया। आज भी यहां पर वो स्थल बना हुआ है जहां भगवान हनुमान को कैद किया गया था। हनुमान को छुड़ाने आए लक्ष्मण को भी उन्होंने यहीं बंधक बना लिया था।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें- यहां पाताल में समाई थी सीता...

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सीता पाताल प्रवेश

बताया जाता है कि सीता यहींं पर पाताल में समाई थीं। जब हनुमान और लक्ष्मण की कोई भी खबर नहीं मिली तब भगवान राम स्वयं यहां युद्ध के लिए आ पहुंचे। युद्ध के बीच में ही उन्हें पता चला की जिन लव-कुश के साथ वह युद्ध कर रहे हैं वह उनके ही पुत्र हैं। इसके बाद माता सीता की राम से मुलाकात भी यहींं पर हुई थी। यह स्थान भी यहां पर मौजूद है और रोज यहां पर भक्तों द्वारा पूजा अर्चना की जाती है।

 

आगे की स्लाइड में पढ़ें- इस पेड़ के नीचे ली थी शिक्षा...

 

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बिठूर
वो पेड़ जिसके नीचे बैठ कर लव-कुश शिक्षा लिया करते थे आज भी वहां मौजूद है।  कुंआ जिसका पानी मां सीता इस्तेमाल करती थी आज भी मौजूद है और उस कुएं का पानी आज भी नहीं सूखा है।
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