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कानपुर के कारोबारी की मौत: पत्नी बोली- जनता की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस ने ही मेरे पति की जान ले ली, पढ़ें पूरा घटनाक्रम

Wed, 29 Sep 2021 02:24 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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कानपुर: मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
गुरुग्राम से दो दोस्तों के साथ घूमने आए कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता (36) की सोमवार देर रात पुलिस की पिटाई से मौत हो गई। आरोप है कि जांच का विरोध करने पर पुलिस कर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। उनके दोस्तों को भी पीटा था। हालत खराब होने के बाद पुलिस मनीष को लेकर एक निजी अस्पताल गई थी, जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस से अकेले ही भेज दिया था, जहां डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। देर रात ही पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। मंगलवार पूरे दिन और देर रात तक काफी किंतु-परंतु के बाद पुलिस ने मामले में रामगढ़ताल थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में निलंबित इंस्पेक्टर जगतनारायण सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा और विजय यादव को नामजद किया गया है। तीन अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। 
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कानपुर: मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ के दुर्गेश वाजपेयी को किया था अंतिम फोन
होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे प्रदीप कुमार व हरवीर सिंह के मुताबिक सोमवार देर रात पुलिस जब अभद्रता व मारपीट कर रही थी, तब मनीष ने अंतिम फोन लखनऊ के दोस्त दुर्गेश वाजपेयी को किया था। फोन पर ही दुर्गेश को पुलिस की ज्यादती बताई थी। फोन पर बात करने के दौरान ही मनीष मुंह के बल गिरे और अचेत हो गए।

 
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मनीष की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मेरे पति की हत्या की गई 
कारोबारी मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने कहा कि जनता की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस ने ही मेरे पति की जान ले ली। बिना वजह पुलिस जांच के नाम पर होटल के कमरे में देर रात घुस गई। जांच के दौरान पुलिस से कुछ सवाल पूछा गया तो तीनों दोस्तों की पिटाई की गई। पति को गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्हें समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया गया और उनकी मौत हो गई। उनकी आंख के पास गंभीर चोट के निशान हैं, जिसे देखने से लग रहा है कि पुलिस ने बट से प्रहार किया है। कंधे के पास हाथ में बड़ा छेद हो गया है। लग रहा कि पुलिस ने रिवॉल्वर की नाल धंसाई है। बाजू के पास भी चोट के निशान हैं। पुलिस ने बेरहमी से पिटाई करके हत्या की है।

 

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कानपुर: मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
तीन घंटे की बातचीत के बाद दर्ज हुआ केस
रियल इस्टेट कारोबारी मनीष की मौत के मामले में मंगलवार रात 9:00 बजे डीएम और एसएसपी बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने मनीष की पत्नी और घरवालों से करीब तीन घंटे तक बातचीत की। इस दौरान एक बार मनीष की पत्नी बाहर आईं और धरने पर बैठ गईं। इसके बाद पुलिस उन्हें समझा कर अंदर ले गई और अफसरों से वार्ता शुरू हुई। काफी बातचीत के बाद मीनाक्षी ने तहरीर को बदला और तीन नामजद व तीन अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया।

 
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कानपुर: मनीष गुप्ता हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
पूरे घर का था भार, अपराध से दूर-दूर तक नहीं था नाता
शिवानी ने बताया कि तीन साल पहले उनकी मां उमा की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। तब से बुजुर्ग पिता अकेले हो गए थे। मनीष आगरा में नौकरी करते थे। पिता के कारण कानपुर लौट आए थे। डेढ़ माह पहले ही वह लखनऊ की एक कंपनी से जुड़े थे। उसी के सिलसिले में वह गोरखपुर गए थे। मनीष के पड़ोसियों ने बताया की वह मिलनसार और शांत व्यक्तित्व के थे। उनका अपराध से दूर-दूर तक नाता नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। मिनाक्षी एक मॉल में काम करती थी। पिछले साल ही मनीष ने छोटी बहन निशा की शादी एक इंजीनियर से कराई थी। मोहल्ले के कई लोग मनीष के घर ढांढस बांधने पहुंचे लेकिन यहां ताला लगा था।
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