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ज्योति हत्याकांड: कोर्ट में पीयूष-मनीषा शर्मसार, बाकी के चेहरों पर नहीं दिखी शिकन

Sat, 22 Oct 2022 08:19 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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ज्योति हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
ज्योति की हत्या में गुरुवार को ही पीयूष, मनीषा समेत छह लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दे दिया था। सभी को जेल भेज दिया गया था। सजा सुनने के लिए शुक्रवार को जेल से सभी छह दोषियों को कोर्ट लाया गया। आरोपियों में एक ओर जहां शहर ही नहीं देश-विदेश का ब्रांड बने पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा थी तो दूसरी ओर बिस्कुट व्यापारी का बेटा पीयूष भी था।

दोषी करार दिए जाने के बाद अपनी गलती और परिवार की साख डुबोने का अहसास उन्हें हो चुका था। शायद इसीलिए दोनों सिर झुकाए शर्मसार दिखे लेकिन बाकी दोषियों के चेहरों पर कोई शिकन नहीं थी। लगा जैसे उन्हें अपने किए का पछतावा ही नहीं। जमानत न मिलने से रेनू, सोनू और अवधेश तो आठ साल से जेल में ही बंद हैं। इतना लंबा समय जेल में काटने से वह जेल के आदी हो चुके हैं और उनके हावभाव से लगा जैसे उन्हें इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि अब उन्हें उम्रभर जेल ही काटनी पड़ेगी।
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अधिवक्ता संजय जाटव - फोटो : अमर उजाला
किसी बेटी की हत्या गलत पर हत्यारों से रुपया लेना सही कैसे
किसी बेटी की हत्या गलत है, हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा मिले यह हर बाप का दर्द होता है लेकिन हत्या के बाद मुकदमा दर्ज कर समझौते के नाम पर हत्यारों से मोटी रकम लेकर समझौता करना सही कैसे हो सकता है। यह सवाल पीयूष के अधिवक्ता संजय जाटव ने मीडिया के सामने उठाए।

ज्योति के पति पीयूष श्यामदासानी को शुक्रवार को कोर्ट में सजा सुनाई जानी थी। इसी दौरान जबलपुर में पीयूष व उसके परिजनों के खिलाफ दर्ज अमानत में खयानत के मुकदमे में पीयूष को समझौते के आधार पर बरी कराने वाले अधिवक्ता संजय जाटव भी कोर्ट पहुंचे थे।
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ज्योति हत्याकांड - फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि जबलपुर में दर्ज कराए गए मुकदमे के खिलाफ उन्होंने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। ज्योति के पिता ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये शादी में खर्च करने की बात कही थी लेकिन उनके उस साल के उनके आयकर रिटर्न में आय लगभग सात लाख ही दिखाई गई थी। ऐसे में इतनी बड़ी रकम कैसे खर्च हुई।

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ज्योति हत्याकांड () - फोटो : फा
जब शंकर अपने जाल में फंसते दिखे तो उन्होंने सामाजिक लोगों के साथ मिलकर समझौते का प्रस्ताव रखा था। पीयूष के पिता ओमप्रकाश ने इसे मानकर शंकर को नगद, ड्राफ्ट, ज्वैलरी व सामान मिलाकर कुल ढाई करोड़ रुपये भुगतान किए। तब शंकर ने समझौता कर मुकदमे को खत्म किया। इसमें साफ-साफ लिखा भी था कि ज्योति की हत्या के बाद आवेश में आकर उन्होंने यह मुकदमा दर्ज कराया था।
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ज्योति हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आवेश में एक मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है तो दूसरा क्यों नहीं। इस मुकदमे में भी पैरवी न करने और पीयूष के अन्य परिजनों को मुकदमे से बरी कराने के नाम पर भी शंकर द्वारा सौदेबाजी करने का आरोप उन्होंने लगाया। उन्होंने कहा कि शासन की ओर से मुकदमा लड़ने के लिए विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति की गई थी। मुकदमे का सारा खर्च शासन ने उठाया। शंकर ने पीयूष के घरवालों से जो रुपया लिया उसे उन्हीं के खिलाफ इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ता रहा।
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