यूपी के कानपुर महानगर में सजेती थाना परिसर में एचसीपी पच्चा लाल गौतम (58) की हत्या उसकी दूसरी पत्नी किरन देवी ने उसके प्रेमी रोडवेज कर्मी जितेंद्र उर्फ महेंद्र यादव के संग मिलकर रची थी। पच्चा लाल उनके अवैध संबंध में आड़े आ रहा था। जितेंद्र ने रिटायर्ड दरोगा हरिदत्त सिंह के बेटे राघवेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।
राघवेंद्र को एक टेलर की मदद से भाड़े पर लाया गया था। किरन और उसके प्रेमी समेत सभी चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर वारदात में प्रयुक्त चाकू, पांच मोबाइल, कलाई घड़ी बरामद कर ली है। देर शाम चारों आरोपियों को माती (कानपुर देहात) कोर्ट में पेश किया गया। वहां से सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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एसएसपी अखिलेश कुमार , आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी अखिलेश कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एचसीपी की हरदोई में तैनाती के दौरान वहीं के कल्याणमल चौरी, बेनीगंज की किरन देवी (39) से करीबियां बढ़ी थीं। किरन पहले से शादी शुदा थी। पच्चा लाल का कानपुर तबादला होने पर किरन भी उसके साथ आ गई। तब से अज्योरी, नवाबगंज में एचसीपी के संग किरन पत्नी के रूप में रह रही थी। यहां रोडवेज कालोनी, नवाबगंज निवासी रोडवेज ड्राइवर जितेंद्र उर्फ महेंद्र यादव की एचसीपी की दोस्ती हो गई। घर आना-जाना शुरू हो गया। उसी दौरान जितेंद्र और किरन में प्रेम संबंध हो गए।
एचसीपी को शक हो गया तो दोनों में झगड़े शुरू हो गए। इसके बाद किरन ने मूलरूप से औरैया के पुरवा अहिरमा, सहायल निवासी जितेंद्र के साथ मिलकर एचपीसी की हत्या की साजिश रची। सोचा कि पच्चा लाल की हत्या के बाद किरन को पेंशन, उसके 17 वर्षीय इकलौते बेटे को पिता की जगह सरकारी नौकरी मिल जाएगी। साथ ही उन लोगों का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
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पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे दरोगा शामिल हुआ रिटायर्ड दरोगा का बेटा
जितेंद्र ने औरैया के रतगांव , बिधूना निवासी टेलर निजाम अली से संपर्क किया। उससे एचसीपी से एक लाख के लेनदेन की बात कहकर दुश्मनी बताई। कहा कि एचसीपी को पीटकर डराना है। इस पर निजाम ने पसहा, बिधूना निवासी रिटायर्ड दरोगा हरिदत्त के बेटे राघवेंद्र से उसकी मुलाकात कराई। मारपीट के लिए राघवेंद्र ने जितेंद्र से 20 हजार रुपये लिए। जितेंद्र ने निजाम के पास भी एक लाख रुपये एडवांस रखवा दिए थे। फिर निजाम से उसने 70-80 हजार रुपया वापस ले लिया था।
एसएसपी के मुताबिक राघवेंद्र से डील पक्की होने के बाद जितेंद्र और राघवेंद्र कई बार सजेती थाने में एचसीपी से मिलने गए। उसके सरकारी आवास में बैठकर शराब पी। एचसीपी के नशे में होने के बाद आरोपियों ने दो बार उसकी हत्या की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुए। 2 जुलाई को राघवेंद्र और जितेंद्र फिर एचसीपी के आवास पर पहुंचे और शराब पी। नशे में होने पर दोनों ने उसकी हत्या कर दी और वहां से भाग निकले।
दीवार पर मिले थे खूनी पंजे के निशान
एचसीपी के कमरे की दीवार पर कई जगह खूनी पंजे के निशान मिले थे। पंजे में चार अंगुलियों के निशान थे। अंगूठे का निशान गायब था। तहकीकात में सामने आया कि राघवेंद्र के हाथ में अंगूठा नहीं हैं। वारदात के दौरान उसका ही पंजा दीवार पर लगा था।
काल डिटेल भी मिली
किरन के मोबाइल की कॉल डिटेल पुलिस ने निकाली तो उसके और जितेंद्र के बीच बातचीत होने की पुष्टि हुई। एसएसपी के मुताबिक हत्या के दिन और 3 जुलाई की भोर में जितेंद्र और किरन की मोबाइल पर बातचीत हुई थी। जितेंद्र ने हत्या से पहले और वारदात के बाद की जानकारी किरन को दी थी।
गुडवर्क वाली टीम
रेलबाजार इंस्पेक्टर मनोज रघुवंशी, घाटमपुर इंस्पेक्टर दिलीप कुमार बिंद, सर्विलांस प्रभारी सुनील लांबा, स्वॉट टीम प्रभारी त्रदीप सिंह, घाटमपुर थाने से दरोगा राजेश रावत और छह सिपाही शामिल रहे। एसएसपी ने इस टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया है।