कोरोना संक्रमण बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं, जिनकी मौत हो जा रही है, उनके शवों को अंत्येष्टि के लिए जगह नहीं मिल रही। भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह में शनिवार को आए शवों का रविवार सुबह सवा चार बजे तक अंतिम संस्कार किया गया।
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भैरो घाट पर लगी भीड़
- फोटो : amar ujala
रविवार को भी शाम तक 10 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पाया था, जबकि आठ शव घंटों से एंबुलेंस में रखे थे। कोरोना संक्रमित का शव पूरे प्रोटोकॉल के तहत विद्युत शवदाह गृह में ही जलाया जाता है। एक शव के अंतिम संस्कार में एक से डेढ़ घंटे लगते हैं। उधर एडीएम आपूर्ति बसंत लाल को विद्युत शवदाह गृहों में सुचारु व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग से सामंजस्य के लिए नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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घाटों के बाहर लगी भीड़
- फोटो : amar ujala
विद्युत शवदाह गृह में 26 शव पहुंचे, देर रात तक होता रहा अंतिम संस्कार
भैरोघाट और भगवतदास घाट विद्युत शवदाह गृह में रविवार को 26 शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे। इनमें 20 से 22 शव कोरोना संक्रमितों के थे। शाम पांच बजे तक भैरोघाट विद्युत शवदाह गृह की दोनों भट्ठियों में 10 शवों का अंतिम संस्कार हो पाया था। आठ शव रखे थे। इसी तरह भगवतदास घाट विद्युत शवदाह गृह में शाम पांच बजे तक पांच शवों का अंतिम संस्कार हो पाया था, जबकि तीन अन्य शव नंबर में रखे थे।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
अस्पतालों के बेड फुल, होम आइसोलेशन में उखड़ने लगीं सासें
मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं। तीमारदार एंबुलेंस में ही मरीज को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटक रहे हैं। मजबूरन हजारों मरीज होम आइसोलेशन में हैं। आक्सीजन सिलिंडरों की कमी की वजह से ऐसे मरीजों की सांसें उखड़ने लगी हैं।
भैरोघाट श्मशान घाट पहुंचे 70 शव, कम पड़ी जगह
भैरोघाट श्मशान घाट में रविवार को अंतिम संस्कार के लिए 70 शव पहुंचे। इस वजह से घाट पर जगह कम पड़ गई। 43 शवों का अंतिम संस्कार कराने वाले जीतू पंडा ने बताया कि एक दिन में इतने शव पहले कभी नहीं आए। होली के बाद से शवों की संख्या बढ़ रही है। पहले रोजाना औसतन 15-20 शव आते थे। भगवतदास घाट श्मशान घाट, सिद्धनाथ घाट और स्वर्ग आश्रम में भी शवों की संख्या तीन से चार गुना बढ़ी है।