टेनरी कब्जे को लेकर हुआ विवाद
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मुस्लिम लॉ के अनुसार परिजन चाहते हैं मालिकाना हक
शहनाज के देवर सज्जाद ने बताया कि वे चार भाई थे। सबसे बड़े दिलशाद, इसके बाद इरशाद, फिर नौशाद थे। उन्हें छोड़कर सभी का निधन हो गया है। दो भाइयों के बच्चे नहीं हैं। उन्होंने बताया कि मुस्लिम लॉ बोर्ड के अनुसार वारिस न होने की हालत में संपत्ति पर परिवार के अन्य के लोगों का अधिकार होता है। इसके अनुसार बड़े भाई नौशाद की मौत के बाद संपत्ति के हकदार सभी तीन भाई के परिजन हैं।
लेकिन भाभी शाहनाज इस संपत्ति को अपने भाई और भांजे को देना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि भाई के बैंक में जमा करीब ढाई करोड़ रुपये भी उन्होंने निकाल लिए हैं। बेगमगंज का मकान, केडीए के ग्रीन हाउस स्थित 200 गज का प्लाट, बंथर उन्नाव में स्थित फैक्ट्री भी बेचना चाहती हैं। लेकिन उन्होंने इन सभी पर मुस्लिम लॉ बोर्ड में वाद दाखिल कर रखा है।