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Raju Srivastav Death: मिला एक बड़ा चांस और राजू ने 'जीत लिया हिंदुस्तान', ऐसे बने थे किंग ऑफ कॉमेडी

Wed, 21 Sep 2022 01:12 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया
जिन्हें देखकर ही चेहरे पर मुस्कान दौड़ जाती थी, वो राजू भइया हम सबको रुलाकर चले गए। उनकी जीवंत हंसी-ठिठौली अब हम कभी नहीं देख पाएंगे। ठेठ कनपुरिया बोली में अपने लोगों से संवाद कर दिल जीत लेने की जो कला राजू श्रीवास्तव में थी, वो शायद ही अब देखने को मिले। कहते हैं न किसी के चेहरे पर हंसी लाना बड़ा नेक काम होता है, वो नेक काम किया है राजू ने। दूसरों को पीछे छोड़ने की होड़, हमेशा आगे बने रहने की दौड़ वाले तनाव के बीच खुश रहना सिखाया है राजू ने। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेकर पूरे देश में छा जाने का उदाहरण पेश किया है राजू ने। सफलता की बुलंदी को छू लेने के बाद भी जमीन से जुड़े रहने का संदेश दिया है राजू ने। ऐसे हर दिल अजीज कॉमेडियन किंग, हास्य कलाकर राजू श्रीवास्तव को कानपुर का सलाम...

काल्पनिक नहीं वास्तविकता में थे राजू के गजोधर भइया
मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के गजोधर भइया के किरदार को कोई भुला नहीं सकता है। द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में इस किरदार के माध्यम से उन्होंने सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ी और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खास बात यह है कि गजोधर भइया कोई काल्पनिक किरदार नहीं हैं, वह राजू के उन्नाव स्थित ममान में रहते थे। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के निधन से उन्नाव के बीघापुर ब्लॉक के मगरायर गांव में रहने वाला चाचा वेद विक्रम श्रीवास्तव का परिवार बहुत परेशान है।
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राजू श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया
वेद बताते हैं कि बचपन से राजू यहां आता था, कभी सोचा नहीं था कि उसका निधन ऐसे हो जाएगा। हम सब उसके स्वस्थ होने की कामना कर रहे थे। वेद विक्रम बताते हैं कि बड़े भाई (राजू के पिता) रमेश चंद्र श्रीवास्तव हास्य रस के कवि थे। अवधी और बैसवारी बोली में काव्य पाठ करने के कारण उन्हें बलई काका के नाम से जाना जाता था। बचपन से राजू उनकी कविताओं को बड़े गौर से सुनता था। राजू का ननिहाल यहां से तीन किमी दूर बेहटा सशान में था। वहां पर एक बुजुर्ग गजोधर रहते थे। वह रुक-रुक कर बोलते थे, उन्हीं का किरदार राजू ने अपनाया और उस किरदार को लोगों ने भी बहुत पसंद किया। 
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अमिताभ बच्चन, राजू श्रीवास्तव - फोटो : social media
गांव से ही मुंबई की ओर निकले थे राजू
वेद विक्रम बताते हैं कि राजू पिता के साथ किदवई नगर में रहते थे। राजू की मंडली नाट्य मंचन आदि में भाग लेती थी पर उनके पिता को यह पसंद नहीं था। एक दिन राजू का रात में कॉमेडी का कोई कार्यक्रम था, तो वह किसी को बिना बताए घर के बाहर लगे नीम के पेड़ के सहारे उतरे और कार्यक्रम में हिस्सा लेने चले गए। इस पर पिता और मां सरस्वती ने उसको बहुत फटकार लगाई। इसके बाद राजू मगरायर आ गए। तीन महीने यहां रहे और यहीं से काम के सिलसिले में मुंबई निकल गए।

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Kaushambi : कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव। - फोटो : Kaushambi
1983 में पहुंचे थे मुंबई, 2005 में मिली थी पहचान
बचपन से ही मिमिक्री और कॉमेडियन का सपना पाले राजू श्रीवास्तव 1983 में फिल्म नगरी मुंबई पहुंचे थे। कई वर्षों के संघर्ष के बाद सन 2005 में उन्हें पहचान तब मिली, जब दि ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में प्रतिभाग करने का मौका मिला। स्टार वन पर प्रसारित होने वाले इस स्टैंडअप कॉमेडी शो में वे सेकंड रनरअप रहे थे। इससे पहले भी उन्होंने फिल्मों में छोटे-मोटे किरदार अदा किए थे, लेकिन जो नाम उन्होंने लॉफ्टर चैलेंज में आने के बाद कमाया, वह लोगों की जुबान पर छा गया था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों और सीरियल में काम किया। इसी शो के बाद उन्हें किंग ऑफ कॉमेडी का नाम मिला था। 
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राजू श्रीवास्तव-शिखा श्रीवास्तव - फोटो : सोशल मीडिया
सफल होने के बाद किया था प्यार का इजहार
1982 में एक रिश्तेदार की शादी में राजू की मुलाकात फतेहपुर में शिखा श्रीवास्तव से हुई थी। मन ही मन राजू उन्हें पसंद करने लगे थे, लेकिन उनके कॅरियर का यह शुरुआती दौर था और उनके पास अपना कुछ नहीं था। इसके बाद वे मुंबई चले गए। कई सालों के संघर्ष के बाद जब उन्होंने मुंबई में अपना नाम कमा लिया और घर बना लिया तब शिखा के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। 1993 में उन्होंने शिखा से शादी की। उनके दो बच्चे अंतरा और आयुष्मान श्रीवास्तव हैं। 
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राजू श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
राजू के नाम अवार्ड 
2016 में यश भारती अवार्ड 
2017 में दादा साहब फाल्के एक्सीलेंस अवार्ड
2020 में टॉप-100 भारतीय व्यक्तित्व में से एक चुने गए
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