जिन्हें देखकर ही चेहरे पर मुस्कान दौड़ जाती थी, वो राजू भइया हम सबको रुलाकर चले गए। उनकी जीवंत हंसी-ठिठौली अब हम कभी नहीं देख पाएंगे। ठेठ कनपुरिया बोली में अपने लोगों से संवाद कर दिल जीत लेने की जो कला राजू श्रीवास्तव में थी, वो शायद ही अब देखने को मिले। कहते हैं न किसी के चेहरे पर हंसी लाना बड़ा नेक काम होता है, वो नेक काम किया है राजू ने। दूसरों को पीछे छोड़ने की होड़, हमेशा आगे बने रहने की दौड़ वाले तनाव के बीच खुश रहना सिखाया है राजू ने। मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म लेकर पूरे देश में छा जाने का उदाहरण पेश किया है राजू ने। सफलता की बुलंदी को छू लेने के बाद भी जमीन से जुड़े रहने का संदेश दिया है राजू ने। ऐसे हर दिल अजीज कॉमेडियन किंग, हास्य कलाकर राजू श्रीवास्तव को कानपुर का सलाम...
काल्पनिक नहीं वास्तविकता में थे राजू के गजोधर भइया
मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के गजोधर भइया के किरदार को कोई भुला नहीं सकता है। द ग्रेट इंडियन लॉफ्टर चैलेंज में इस किरदार के माध्यम से उन्होंने सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ी और उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। खास बात यह है कि गजोधर भइया कोई काल्पनिक किरदार नहीं हैं, वह राजू के उन्नाव स्थित ममान में रहते थे। मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव के निधन से उन्नाव के बीघापुर ब्लॉक के मगरायर गांव में रहने वाला चाचा वेद विक्रम श्रीवास्तव का परिवार बहुत परेशान है।