कानपुर में जेल से जमानत पर छूटे एक युवक का अधजला शव सचेंडी क्षेत्र की झाड़ियों में पड़ा हुआ मिला था। अमित के परिजनों को चकेरी थाने से टरका दिया गया था। जिससे न केस दर्ज करना पड़े और न तहकीकात करने की जद्दोजहद करनी हो। जिस पुलिसकर्मी ने संवेदनहीनता दिखाई थी अब वह बेनकाब हो गया है।
दरोगा अरुण यादव का यह लापरवाही भरा रवैया था। हैरानी की बात ये है कि इतनी बड़ी वारदात में लापरवाही बरतने वाला दरोगा पर उच्चाधिकारियों की मेहरबानी बरकरार है। उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अमित से उसके परिजनों की आखिरी बार बात शनिवार शाम पांच बजे हुई थी। तब उसने आधे घंटे में घर लौटने की बात कही थी।