स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की पैंट्री कार में 15-16 फरवरी की रात मिले 1.40 करोड़ रुपये से भरे बैग को सेंट्रल स्टेशन पर उतरवाने और इसके बाद इंटरकॉम पर आई कॉल के कनेक्शन की जांच शुरू हो गई है।
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जीआरपी के पास ट्रेन की पेंट्रीकार में मिला था नोटों से भरा बैग
- फोटो : amar ujala
जीआरपी और आयकर विभाग इन रुपयों पर दावा करने वाली कंपनी बी-4एस सॉल्यूशंस का रेलवे से कनेक्शन ढूंढ रही है। क्योंकि यह कंपनी टेलीकॉम सेक्टर की बताई जा रही है, लिहाजा इंटरकॉम पर कॉल आना संदेह को बढ़ा देता है।
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जीआरपी के पास ट्रेन की पेंट्रीकार में मिला था नोटों से भरा बैग
- फोटो : अमर उजाला
जांच का बिंदु यह भी है कि डीएफसी लाइन पर बने स्टेशन के इंटरकॉम फोन से भी रेलवे स्टेशनों के इंटरकॉम पर बात की जा सकती है। इस मामले पर भी जांच एजेंसियों को कुछ सुराग मिले हैं। ट्रेन के कानपुर सेंट्रल पहुंचने पर डिप्टी एसएस ऑफिस के इंटरकॉम में कॉल करके कर्मचारी को भेजकर रुपयों का बैग मंगवाया गया।
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ट्रेन की पेंट्रीकार में मिला था नोटों से भरा बैग
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद बाहर खड़े व्यक्ति को बैग देने की डिमांड की गई लेकिन बिना पहचान के बैग देने से मना करने के बाद खेल बिगड़ा और रुपयों को जीआरपी के मालखाने में रखवाना पड़ा। आयकर विभाग ने बैंक में रुपये तो जमा करा दिए लेकिन इसके बाद गाजियाबाद की कंपनी का रुपयों पर दावा करने के बाद जांच भी शुरू कर दी। जीआरपी भी जांच कर रही है।
मामले से जुड़े सभी के बयान लिए जा चुके हैं। जांच के दौरान जरूरत पर दोबारा पूछताछ भी जा सकती है। कंपनी का रेलवे से कनेक्शन और दूसरे बिंदुओं पर जांच चल रही है। राममोहन राय, जीआरपी इंस्पेक्टर, कानपुर सेंट्रल