जरा सोचिए, घरवालों ने जिसे मरा मानकर रीति-रिवाजों के अनुसार तीजा और चालीसवां कर डाला हो, वह व्यक्ति कुछ दिनों बाद सही सलामत जिंदा वापस लौट आए तो उस परिवार की स्थिति क्या होगी...? और तो और उस व्यक्ति पर क्या बीत रही होगी, जब उसे ये पता चला होगा कि उसके परिवार वाले उसका अंतिम संस्कार कर चुके हैं। असल में ये कोई कहानी नहीं बल्कि झांसी की रेलवे कॉलोनी स्थित मालगोदाम के पास रहने वाले 65 साल के व्यक्ति नवाब खान की जिंदगी की हकीकत है।
नवाब खान मालगोदाम के पास रहते हैं। इनकी पत्नी का नाम रोशन है। इनकी तीन बेटियां आसमां, रेशमा और परवीन हैं, तीनों की शादी हो चुकी है। बेटियां इसी इलाके में आसपास अपने पति के साथ रहती हैं। दो बेटे साबिर और सोनू भी हैं। नवाब खान का ससुराल भी मालगोदाम इलाके में ही है। ससुराल में इनकी बुजुर्ग सास अकीला और साला रियाज अपने परिवार के साथ रहते हैं। काम के नाम पर ये लोग रेलवे कॉलोनी के बंगलों में साफ-सफाई करते हैं।