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लूसी और यूली की दास्तां: साथी श्वान की तेरहवीं पर 'रानी' मायूस, कब्र पर चढ़ाई माला, देखें भावुक पलों की तस्वीरें

Mon, 13 Jun 2022 06:15 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
पुलिस के खोजी श्वान लूसी की 31 मई को मौत हो गई थी। सोमवार को लूसी के हैंडलर यशपाल सिंह और शिवजीत सिंह यादव द्वारा उसकी तेरहवीं आयोजित की गई। इस दौरान लगभग दो सौ श्वानों को दूध और ब्रेड खिलाई गई। इतना ही नहीं, दोनों हैंडलर ने अपनी तरफ से साथ पुलिस कर्मियों को खीर, पूड़ी और पनीर की सब्जी खिलाई। हैंडलर लूसी की कब्र पर उसके साथी श्वान यूली को लेकर पहुंचे। वह गंध से लूसी की कब्र को पहचान गया और भौंकने लगा। इसके बाद उसने कब्र पर माला चढ़ाई। वह वापस वाहन में नहीं जा रहा था। मुश्किल से उसे हैंडलर वाहन में ले जा पाए। 
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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने उसको 2013 में हैदराबाद से खरीदा गया था। ट्रेनिंग के बाद उसे 2014 में पुलिस दस्ते में शामिल कर लिया गया था। हैंडलर यशपाल और शिवजीत ने बताया कि तकरीबन आठ साल से लूसी उनके साथ थी। उससे भावनात्मक जुड़ाव हो गया था। यही वजह है कि उन्होंने लूसी की तेरहवीं की और उसकी कब्र पर फूल चढ़ाए।

 
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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
आठ साल तक लूसी ने झांसी पुलिस का साथ निभाया। आठ साल की नौकरी के दौरान लूसी ने पचास से अधिक मामलों के खुलासे में अहम जिम्मेदारी निभाई।

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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
लूसी झांसी पुलिस के साथ काम करने वाला खोजी श्वान था। पुलिस महकमे के दस्तावेजों में क्यूनी नाम से दर्ज इस जर्मन शेफर्ड नस्ल के श्वान को पुलिस महकमे में प्यार से लूसी बुलाते थे। लूसी उच्च प्रशिक्षण प्राप्त डॉग था। 

 
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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
साल 2013 में जन्म के तुरंत बाद उसे ग्वालियर स्थित राष्ट्रीय श्वान प्रशिक्षण केंद्र भेज दिया गया। उसने नौ माह तक मानव गंध पहचानने की सबसे कठिन ट्रेनिंग हासिल की।
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खोजी श्वान लूसी का तेरहवीं संस्कार - फोटो : अमर उजाला
यह प्रशिक्षण सबसे कठिन माना जाता है। इसके बाद वर्ष 2014 को लूसी ने झांसी पुलिस ज्वाइन की। उसको यहां यूली (रानी) का साथ मिला। अपनी तैनाती के बाद से ही लूसी ने कई अहम सुराग खोजने में पुलिस की मदद की।
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