अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली शैली सिंह का बचपन बहुत परेशानियों में गुजरा है। पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते मां ने कपड़े सिलकर तीनों बच्चों को पाला। गांव में खेल मैदान नहीं था तो शैली खेत पर ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। रस्सी नहीं थी तो मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती रही। बेटी के रजत पदक जीतने पर उसके ननिहाल में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बिटिया ने सबका मान गर्व से ऊंचा कर दिया।
महानगर से बीस किलोमीटर की दूरी पर झांसी-कानपुर हाईवे पर स्थित पारीछा गांव शैली का ननिहाल है। यहीं पर ही शैली पैदा हुई। बचपन से नानी के घर पर ही रही। शैली के मामा बृजेंद्र सिंह ने बताया कि शुरूआत से ही शैली का खेल के प्रति रुझान था। वह अपने आप ही खेल खेलती रहती थी। जैसे-जैसे वो बढ़ी होती गई उसका रुझान भी लंबी कूद की तरफ बढ़ता गया। रस्सी नहीं थी तो वो मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती थी। नानी के घर से लगा हुआ खेत है, जहां पर शैली लंबी कूद की प्रैक्टिस करती रही। किसी भी परिवार के सदस्य ने शैली को खेलने-कूदने से मना नहीं किया, बल्कि उसे प्रोत्साहित किया। बृजेंद्र के मुताबिक खेलकूद के दौरान ही सभी को लगने लगा था कि वो आगे चलकर इस खेल में खूब नाम कमाएगी। इसीलिए उसे प्रैक्टिस करने के लिए दो साल पहले बंगलूरू भेज दिया। अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वो भले ही रजत पदक जीती हो लेकिन परिजनों के लिए गोल्ड पदक के बराबर ही है।