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झांसी: खेत में खेलकर बड़ी हुई शैली, मैदान नहीं था तो गांव की सड़काें पर दाैड़कर खुद काे किया तैयार

Sun, 29 Aug 2021 10:14 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी

सार

पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते मां ने कपड़े सिलकर तीनों बच्चों को पाला। गांव में खेल मैदान नहीं था तो शैली खेत पर ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। रस्सी नहीं थी तो मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती रही। बेटी के रजत पदक जीतने पर उसके ननिहाल में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बिटिया ने सबका मान गर्व से ऊंचा कर दिया।
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शैली सिंह। - फोटो : सोशल मीडिया
अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली शैली सिंह का बचपन बहुत परेशानियों में गुजरा है। पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते मां ने कपड़े सिलकर तीनों बच्चों को पाला। गांव में खेल मैदान नहीं था तो शैली खेत पर ही प्रैक्टिस शुरू कर दी। रस्सी नहीं थी तो मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती रही। बेटी के रजत पदक जीतने पर उसके ननिहाल में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बिटिया ने सबका मान गर्व से ऊंचा कर दिया।
महानगर से बीस किलोमीटर की दूरी पर झांसी-कानपुर हाईवे पर स्थित पारीछा गांव शैली का ननिहाल है। यहीं पर ही शैली पैदा हुई। बचपन से नानी के घर पर ही रही। शैली के मामा बृजेंद्र सिंह ने बताया कि शुरूआत से ही शैली का खेल के प्रति रुझान था। वह अपने आप ही खेल खेलती रहती थी। जैसे-जैसे वो बढ़ी होती गई उसका रुझान भी लंबी कूद की तरफ बढ़ता गया। रस्सी नहीं थी तो वो मां की साड़ी पर लकड़ी बांधकर कूदती थी। नानी के घर से लगा हुआ खेत है, जहां पर शैली लंबी कूद की प्रैक्टिस करती रही। किसी भी परिवार के सदस्य ने शैली को खेलने-कूदने से मना नहीं किया, बल्कि उसे प्रोत्साहित किया। बृजेंद्र के मुताबिक खेलकूद के दौरान ही सभी को लगने लगा था कि वो आगे चलकर इस खेल में खूब नाम कमाएगी। इसीलिए उसे प्रैक्टिस करने के लिए दो साल पहले बंगलूरू भेज दिया। अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में वो भले ही रजत पदक जीती हो लेकिन परिजनों के लिए गोल्ड पदक के बराबर ही है।

 
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झांसी: खेत में खेलकर बड़ी हुई शैली, मैदान नहीं था तो गांव की सड़काें पर दाैड़कर खुद काे किया तैयार

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गांव पारीछा का खेत जिसमें शैली अभ्यास करती थी। - फोटो : अमर उजाला
शैली की अब एशियन गेम्स पर हैं निगाहें
जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव अर्जुन सिंह ने बताया कि शैली से सोमवार को उनकी फोन पर बात हुई है। बातचीत में उसने बताया कि अगले साल होने वाले एशियन गेम्स पर उसकी निगाहें हैं। इसके लिए वह भारत आते ही तैयारी शुरू कर देगी।

आधे घंटे तक तय ही नहीं हो पाया विजेता कौन है!
अर्जुन सिंह ने बताया कि चैंपियनशिप में शैली सवा छह से साढ़े छह मीटर की छलांग सामान्य तौर पर ही लगाती रहती है। चैंपियनशिप के फाइनल में उसने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को कांटे की टक्कर दी। तीन छलांगों में शैली ने बढ़त कायम रखी। चौथी छलांग में मुकाबला इतना कड़ा था कि आधा घंटा विजेता तय होने में लग गया। बाद में बेहद मामूली अंतर से शैली दूसरे स्थान पर काबिज हुई।

शैली की एक बहन और एक भाई है
विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली शैली की एक बड़ी बहन है, जो बनारस में रहकर नौकरी करती है। जबकि एक 14 साल का छोटा भाई भी है, जो पढ़ाई कर रहा है।  

 
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अपनी मां विनीता के साथ शैली। - फोटो : अमर उजाला
नानी बोलीं- बिटिया पर गर्व, ओलंपिक में भी जीतेगी
शैली की नानी मीरा सिंह का कहना है कि बिटिया ने शानदार प्रदर्शन करके परिवार और गांव वालों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। अब हमें उम्मीद है कि ओलंपिक में भी शानदार प्रदर्शन करके वो देश के लिए पदक जीतकर आएगी।

गांव वालाें में खुशी की लहर
शैली के प्रदर्शन से गांव का हर व्यक्ति बहुत खुश है। वह बेहद प्रतिभाशाली है। आगे और बड़े आयोजनों में भी वो पदक जीतकर झांसी और देश का नाम रोशन करेगी। - अशोक गुप्ता, ग्रामीण
शैली महिला शक्ति की मिसाल है। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं के इरादों को मजबूती मिलेगी। पूरी उम्मीद है कि कई और प्रतिभाएं निकलकर आगे आएंगी। - रजनी, ग्रामीण
छोटे से गांव की बिटिया शैली ने आज विश्व में अपना परचम लहराया है। यह इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादे हों तो बड़ी से बड़ी चुनौती कुछ नहीं बिगाड़ सकती। - अन्नू यादव, ग्रामीण
शैली के गांव लौटने का हर कोई इंतजार कर रहा है। जब भी वो गांव आएगी, हर कोई व्यक्ति उसका स्वागत करेगा। पारीछा, झांसी और देश का मान उसने बढ़ाया है। - राजू राजपूत, ग्रामीण
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