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चित्रकूट जेल गोलीकांड: जानिए कौन है अंशुल दीक्षित उर्फ अंशू, जिसने मुकीम काला और मेराज को गोलियों से भूना

Fri, 14 May 2021 02:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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शॉर्प शूटर अंशुल दीक्षित (मृतक) - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिला जेल में शुक्रवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से शुरू हुई। जेल में बंद शार्प शूटर कैदी अंशुल दीक्षित ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर पश्चिम यूपी के बड़े बदमाश मुकीम काला और मेराजुद्दीन को गोलियों से भून डाला। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने अंशू को भी मार गिराया। चित्रकूट धाम मण्डल के आईजी के. सत्यनारायण ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि जेल में पश्चिम यूपी के टॉप मोस्ट क्रिमिनल मेराजुद्दीन और मुकीम उर्फ काला पर शार्प शूटर अंशुल दीक्षित ने गोलियां दागीं। दोनों गुटों में हुए संघर्ष में मेराजुद्दीन और मुकीम मारे गए। इसके बाद पुलिस बल ने जेल के अंदर ही अंशुल का एनकाउंटर कर दिया। चित्रकूट जेल में गोली मारकर कैदी की हत्या करने के आरोपी अंशु दीक्षित को 2014 में गोरखपुर एसटीएफ ने दबोचा था। तब उसे सीएमओ विनोद आर्या के बहुचर्चित हत्याकांड के मामले में गोरखनाथ थाना क्षेत्र के 10 नंबर बोरिंग से मुठभेड़ के बाद उसे अरेस्ट किया था।
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जेल के बाहर तैनात फोर्स - फोटो : amar ujala
उसके खिलाफ लखनऊ यूनिवर्सिटी के छात्र नेता विनोद त्रिपाठी की भी हत्या का आरोप है। बदमाश पर जीआरपी सीतापुर ने 5 हजार जबकि भोपाल मध्य प्रदेश की पुलिस ने 10 हजार का इनाम घोषित किया था।
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मुकीम काला - फोटो : amar ujala
तब एसटीएफ ने बदमाश के कब्जे से एक पिस्टल, एक तमंचा, कारतूस और फर्जी आईडी प्रूफ बरामद किया था। एसटीएफ की पूछताछ में अंशू ने स्वीकार किया कि वह सीतापुर के एमएलसी भरत त्रिपाठी और उनके बेटे परीक्षित त्रिपाठी की हत्या के लिए साथियों की तलाश करने के लिए गोरखपुर आया था। अंशू द्वारा की गई फायरिंग में सीओ एसटीएफ विकास चंद्र त्रिपाठी, कांस्टेबल अनूप कुमार, एसआई सत्य प्रकाश सिंह और हेड कांस्टेबल भानू प्रताप सिंह बाल-बाल बचे थे।

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चित्रकूट एसपी अंकित मित्तल - फोटो : amar ujala
पुलिस टीम ने तलाशी के दौरान एक पिस्टल, चार खोखा, दो कारतूस, एक तमंचा, एक खोखा और तीन कारतूस बरामद किया था। पुलिस को बदमाश ने अपना नाम अंशू उर्फ सुमित दीक्षित पुत्र जगदीश प्रसाद दीक्षित, कुड़राबनी थाना मानपुर जिला सीतापुर बताया था। अंशू के पास लिवाइस का पर्स मिला था। जिसमें स्टेट बैंक का वीसा कार्ड था, जिस पर पूजा अंकित था और उसका नंबर 4591510105489830 अंकित था।
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अंशुल के पास जेल में भी रहता था फोन - फोटो : amar ujala
एक ग्रीन कार्ड मिला था, जिस पर आदित्य मिश्रा पुत्र जगदीश मिश्रा मकान संख्या 24 रामनाथ देवरिया अंकित है। एक आधार कार्ड जिस पर आदित्य मिश्रा निवासी 299 /2 ए साकेत नगर टुजुर भोपाल, मध्य प्रदेश लिखा है। इसके अतिरिक्त पिपराइच के उनवल दोयम गांव के पते पर आदित्य मिश्रा पुत्र जगदीश मिश्रा के नाम पर वोटर कार्ड मिला है। सभी पर अंशु दीक्षित की ही फोटो लगी थी।
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