फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चित्रकूट जेल में खूनी खेल: मारे गए अपराधियों के क्षेत्र से आए बंदियों पर भी शक, पांच बंदियों से दो टीमों ने की पूछताछ

Tue, 18 May 2021 10:06 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
विज्ञापन
1 of 6
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट जिला जेल में ईद के दिन गैंगवार के दौरान शार्पशूटर और पुलिस मुठभेड़ में ढेर अंशू दीक्षित ने जिन पांच बंदियों को अपनी गिरफ्त में लेकर जिला पुलिस और बंदी रक्षकों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी, उनसे डीआईजी और जिला पुलिस की जांच टीम ने सोमवार को अलग से चार घंटे तक पूछताछ की। मामले की जांच कर रहे डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी घटना के ही दिन से ही यहां पर डेरा डाले हुए हैं। सोमवार को भी वह जिला कारागार पहुंचे और कई घंटे तक रुककर अंदर घटना की तह तक पहुंचने के लिए छानबीन की। डीआईजी जेल के अलावा चित्रकूट जिला पुलिस की जांच टीम के अधिकारी सीओ सिटी शीतला प्रसाद पांडेय, कोतवाल वीरेंद्र त्रिपाठी, जांच अधिकारी रामाश्रय सिंह जिला जेल परिसर पहुंचे और सभी संदिग्धों समेत घटना के दिन जेल परिसर में मौजूद कर्मचारियों को बुलाकर पूछताछ हुई। निलंबित जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी और निलंबित जेलर महेंद्र पाल के सामने ही निलंबित दोनों वार्डन संजय और हरी से पूछताछ हुई।
विज्ञापन

2 of 6
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
इसी दौरान जेल के अन्य वार्डन और सुरक्षाकर्मियों के नाम सामने आने पर जांच टीम ने पूरी जानकारी मांगी है। सूत्रों के अनुसार, दो वार्डन अरविंद व पीयूष 10 मई व इसके पहले से अवकाश पर हैं। एक अन्य वार्डन पीडी पाल को बुलाया गया तो पता चला कि इसी की ड्यूटी हाई सिक्योरिटी बैरक के पास रहती थी, लेकिन अचानक ही 14 मई की सुबह से इसकी ड्यूटी वहां से हटाकर बाहर लगा दी गई। बैरक के पास आने जाने वालों की जानकारी ली गई तो एक बंदी का नाम सामने आया। यह बंदी चित्रकूट जिले के ही एक गांव का निवासी है जो हत्या मामले में जेल में बंद है।

 
विज्ञापन

3 of 6
चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
बताया गया कि यह जेल का कारखास है। जो हर बैरक तक आना जाना और सामग्री पहुंचाने का काम करता है। इसकी जानकारी होने पर दोनों जांच टीम ने अलग-अलग इन दोनों को बुलाकर लगभग एक घंटे तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार दोनों सही जवाब नहीं दे पाए, जिससे अभी आगे भी इनसे पूछताछ की जाएगी। इसके बाद जांच टीम ने हाईसिक्योरिटी बैरक के सभी कमरों में पहुंची, वहां मौजूद बंदियों से पूछताछ की। वहां की लोकेशन को देखने के बाद आइसोलेट बैरक की ओर गई।
 

4 of 6
घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
एक और वार्डन के साथ कारखास की भूमिका संदिग्ध
यूपी की हाई सिक्योरिटी वाली चित्रकूट जेल में हुए खूनी खेल के बाद जांच का काम जारी है। इसी बीच जेल के एक अन्य वार्डन के अलावा बंदियों के कारखास पर भी शक की सुई घूम गई है। घटना के कुछ दिन पहले से दो वार्डन तो अवकाश पर थे। घटना के दिन मौजूद दोनों वार्डन को निलंबित कर दिया गया है, लेकिन एक अन्य वार्डन के बारे में बताया गया कि यह तो हाई सिक्योरिटी बैरक के पास की ड्यूटी वाला है। जेल अधीक्षक से लेकर बंदियों के बीच के कारखास की इस कांड में भूमिका संदिग्ध है। सोमवार को डीआईजी जेल ने इन दोनों को भी पूछताछ के दायरे में लेकर कई सवाल किए, जिसमें कई जवाब दोनों नहीं दे पाए, जिससे अब इनकी भूमिका को लेकर पूरी जांच पडताल की जा रही है।
विज्ञापन

5 of 6
गेट पर तैनात फोर्स - फोटो : amar ujala
पीसीओ के रिकार्ड जांच टीम ने कब्जे में लिया
बैरक के बीच में बने पीसीओ से भी जांच टीम ने कई रिकार्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, यहां से फोन करने वालों या फोन आने वालों की पश्चिम उत्तर प्रदेश या अन्य जिलों से आने वाले कुख्यात अपराधियों की सूची नाममात्र की है, जबकि बताया गया कि इन्हीं को यहां फोन करने की पूरी छूट थी। जेल के फोन रिकार्ड की जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बताया कि अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। लगातार जांच चल रही है हर दिन नये बिंदू सामने आ रहे हैं।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जांच कर निकलते अधिकारी (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
जेल के 18 बंदी भी जांच के दायरे में
जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक व अस्थायी बैरक में वर्तमान में मौजूद सभी 18 बंदी जांच के दायरे में हैं। सोमवार को प्रत्येक बंदी से अलग-अलग पूछताछ कर अधिकारी घटना की जानकारी करने की कोशिश कर रहे हैं। इन बंदियों में कई ऐसे भी हैं जो शार्पशूटर अंशू दीक्षित, मेराज अली के साथ कई दिनों से थे और उसी क्षेत्र के भी हैं। हाई सिक्योरिटी बैरक में शार्प शूटर अंशू दीक्षित, कुख्यात अपराधी मेराजुद्दीन समेत 12 बंदी थे, जबकि बंदियों के क्वारंटाइन के लिए बनाई गई अस्थार्यी बैरक में मुकीम काला समेत नौ बंदियों को रखा गया था। हाई सिक्योरिटी बैरक में बचे 10 बंदियों में अधिकतर हार्डकोर अपराधी हैं और ज्यादातर बाहरी जनपदों से लाकर यहां रखे गए हैं। जांच अधिकारियों ने इनसे पूछताछ की है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें