चित्रकूट जिला जेल में लगे कुल 32 सीसीटीवी कैमरों में सिर्फ आठ ही संचालित हैं। यह इत्तेफाक ही है कि सारे खराब कैमरे मुख्य गेट के अंदर वाले हैं और बाहर के सभी सही हैं। अगर बाहर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जाए तो कुछ न कुछ सुराग मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, तीनों कुख्यातों अंशू दीक्षित, मेराज अली और मुकीम काला से हफ्ते में एक व्यक्ति जरूर मिलने आता था। कोरेाना काल में जब आम लोगों के लिए मिलाई बंद थी तब भी इन अपराधियों की मिलाई मोटी रकम लेकर कराई जाती थी। बाहर के सीसीटीवी फुटेज से काफी कुछ जानकारी हो सकती है। उधर, निलंबित जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी ने कुछ भी कहने से जहां इनकार किया, वहीं निलंबित जेलर महेंद्र पाल ने कहा कि जांच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी।
जेल के अंदर नियमों का कड़ाई से पालन कराने का काम जारी है। सीसीटीवी कैमरों को बनवाने के लिए फिर पत्र लिखा गया है। संबंधित कार्यदायी एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई को भी पत्र लिखा गया कि आखिर इतने दिनों से इन्हें क्यों नहीं बनवाया गया। - अशोक कुमार सागर, जेल अधीक्षक, चित्रकूट