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संगम पर जली दीपमालाएं, भगवान सूर्य को अर्घ्यदान

Sat, 06 Jun 2020 01:18 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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lockdown in prayagraj - फोटो : lockdown in prayagraj
प्रयागराज। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर शुक्रवार को त्रिवेणी तट पर आस्था, भक्ति और विश्वास के संगम में हजारों लोगों ने डुबकी लगाई। इस दौरान सुख, समृद्धि और शांति की कामना से संगम तट पर पूजा की गई। कहीं रेती पर शिवलिंग बनाए गए तो कहीं अर्घ्य देने की होड़ मची रही। कोरोना से निजात के लिए मां गंगा का दुग्धाभिषेक कर संतों-भक्तों ने जयकारे भी लगाए। इस दिन लोगों ने व्रत रखकर लोक मंगल की कामना से भगवान विष्णु की सविधि पूजा की।
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lockdown in prayagraj - फोटो : lockdown in prayagraj
पौ फटने के साथ ही रिमझिम फुहारों के बीत संगम तट पर शुक्रवार की सुबह ज्येष्ठ पूर्णिमा स्नान शुरू हुआ। जेटी से बने सुरक्षा घेरा के बीच दिन भर श्रद्धाुओं ने संगम में डुबकी लगाई। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए तीर्थपुरोहितों ने संकल्प कराए। कुछ दिन पहले तक जहां लॉकडाउन में संगम पर सन्नाटा छाया रहता था, वहीं इस दिन खुशनुमा मौसम के बीच सैकड़ों चार पहिया वाहनों का रेती पर तांता लगा रहा।
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lockdown in prayagraj - फोटो : lockdown in prayagraj
इस दौरान पुरोहितों की चौकियों पर कहीं पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान हो रहे थे, तो कहीं  सुख-शांति की कामना से संकल्प दिलाए जा रहे थे। लोगों ने गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र का दान भी खूब किया। तीर्थपुरोहित घंटी महाराज के चेहरे पर खुशी के भाव देखते बन रहे थे।

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lockdown in prayagraj - फोटो : lockdown in prayagraj
वह पूजा का संकल्प कराने के साथ ही लोगों को सोश डिस्टेंसिंग के पालन की साह भी बार-बार दे रहे थे। देर शाम तक संगम तट श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत रखने वाली महिलाओं ने वट वृक्षों की पूजा की। पद्मपुराण और भविष्य पुराण में ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत रखकर विष्णु की उपासना करने से मन, वाणी और कर्म से किए गए पाप कर्मों से मुक्ति मिलने का उल्लेख है।

 
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lockdown in prayagraj - फोटो : lockdown in prayagraj

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर संगम स्नान के साथ ही पितरों के नाम पर तर्पण पिंडदान किया गया। पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस तिथि पर पिंडदान करने की परंपरा रही है। भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर लोगों ने पितरों की शांति के लिए तर्पण किया। इसके बाद ब्राह्मण भोजन भी कराया गया। पं. ओम नारायण, ज्योतिषाचार्य।
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