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Farmer Death Case: किसान की मौत पर फूट-फूटकर रोए परिजन, सदमे में पत्नी, देखें तस्वीरें

Sat, 25 Jun 2022 05:51 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
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किसान की मौत पर बिलखते परिजन। - फोटो : amar ujala
बिजनौर में झालू में किसान की मौत पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है जबकि, पत्नी सदमे में हैं। वहीं सहकारी समिति परिसर में हुई किसान की मौत के प्रकरण की जांच बैठ गई है। अपर जिला सहकारी अधिकारी अर्थात एडीसीओ जांच करेंगे। किसान पर फर्जी फर्द लगाकर सहकारी समिति से ऋण लेने का आरोप है। धोखाधड़ी कर कर्ज लेने में 15 किसानों के खिलाफ समिति के अधिकारियों ने रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। जिसमें मृतक किसान का भी नाम शामिल है। सहायक निबंधक सहकारी समितियां डॉ. प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि ऋण वसूली में शासन के तय मानकों का पालन किया गया है।

जहर खाकर आत्महत्या करने वाला किसान रेवती झालू जाटान सहकारी समिति का सदस्य है। समिति किसानों को खाद, बीज खरीदने समेत नगद ऋण देती है। रेवती ने भी समिति से ऋण लिया। समिति किसान पर ऋण जमा करने के लिए दबाव डाल रही थी। जिससे क्षुब्ध होकर किसान ने 23 जून को समिति परिसर में जहरीला पदार्थ खा लिया था। किसान की उपचार के दौरान मौत हो गई।
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हंगामा करते ग्रामीण। - फोटो : amar ujala
सहायक निबंधक सहकारी समितियां डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच अपर जिला सहकारी अधिकारी अर्थात एडीसीओ को सौंपी गई है। एडीसीओ मौत के सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट देंगे। सहायक निबंधक के मुताबिक, जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। बताया कि विभाग के कर्मचारी पांच लाख नकद देकर मृतक किसान की आर्थिक सहायता करेंगे।

वर्ष 2016 में लिया था ऋण
सहायक निबंधक सहकारी समितियां डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि किसान रेवती ने समिति से वर्ष 2016 में 99,600 रुपये का ऋण लिया था। नियमानुसार किसान को 30 जून 2017 तक ब्याज समेत भुगतान करना था। आरोप है कि किसान ने छह साल में भुगतान नहीं किया। जिससे ऋण की मूल धनराशि ब्याज समेत एक लाख 56,600 रुपये हो गई है। समिति अधिकारी किसान से ऋण जमा करने के लिए बार बार कह रहे थे।
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हंगामा करते परिजन। - फोटो : amar ujala
ये है ऋण वसूली के नियम
सहायक निबंधक सहकारी समितियां डॉ. प्रदीप कुमार के अनुसार शासन से ऋण वसूली की प्रक्रिया तय है। किसान द्वारा सामान्य रूप से एक साल में 30 जून तक ऋण भुगतान करने पर सात प्रतिशत ब्याज देय है। परंतु शासन ने चार प्रतिशत सब्सिडी दे रखी है। इस प्रकार किसान को केवल तीन प्रतिशत ब्याज देना होता है। एक साल में भुगतान नहीं करने पर सात प्रतिशत ब्याज देना होता है। वसूली के लिए 25 (क) का नोटिस दिया जाता है, फिर पीला नोटिस जारी होता है और इसके बाद रेड नोटिस दिया जाता है। यदि किसान फिर भी ऋण भुगतान नहीं करता है, तब गिरफ्तारी वारंट लिया जाता है। आखिर में कुर्की किए जाने का प्रावधान है।

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विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
मृतक पर फर्जी फर्द से ऋण लेने का आरोप
सहायक निबंधक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के अनुसार मृतक रेवती पर फर्जी फर्द लगाकर ऋण लेने का आरोप है। बताया की मृतक रेवती के पास दो बीघा जमीन है। उसने फर्जी तरीके से 20 बीघा की फर्द बना ली थी तथा ऋण ले लिया था। करीब तीन माह पहले मामला संज्ञान में आने पर मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें जांच चल रही है। रेवती सिंह समेत लगभग 15 किसानों ने कपट पूर्वक खतौनी, खसरा लगाकर झालू जाटान किसान सहकारी समिति से कर्ज ले रखा है। जिसमें प्रबंध निदेशक शिव बहादुर सिंह ने 15 किसानों के विरुद्ध 09 मार्च 2022 को हल्दौर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी करने की धारा में मुकदमा पंजीकृत कराया था।
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किसान की मौत का मामला। - फोटो : amar ujala
सवालों के घेरे में समिति की कार्यप्रणाली
सिर्फ एक नहीं बल्कि 15 किसानों ने फर्जी कागजों के आधार पर समिति से कर्ज ले लिया। ऐसे में समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर कर्ज देने से पहले समिति ने पूरी तरह से जांच क्यों नहीं की?, खतौनी का तहसील से सत्यापन क्यों नहीं कराया? ऐसे में फर्जी खसरा खतौनी के आधार पर कर्ज लेने की संख्या ज्यादा भी हो सकती है।
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