उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में मुठभेड़ में दबोचे गए बदमाश रंजीत और अमजद की तलाश में राजस्थान व पंजाब पुलिस खाक छानती घूम रही थी। रंजीत को दस साल पहले एनएसजी (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) कमांडो रहते हुए आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर बर्खास्त किया गया था। इसके बाद रंजीत ने अपना गैंग बना लिया था और वारदातों को अंजाम देने लगा।
पंजाब के पटियाला की प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाला रंजीत एनएसजी में कमांडो था। परिवार के लोग भी रंजीत पर फख्र करते थे। कमांडो रहते हुए रंजीत बुरी संगत में पड़ गया और आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा। रंजीत को दस साल पहले एनएसजी से बर्खास्त कर दिया गया था। रंजीत की नजर सोना लूटने पर लगी रहती थी। उसने अपने गैंग के साथ मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, दिल्ली, हापुड़, सहारनपुर, बागपत, पंजाब व राजस्थान में लूट की घटनाओं को अंजाम दिया। एक मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई। उस मामले में वह फरार चल रहा है।