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दरोगा की दर्द भरी कहानी: मजबूरी में दिया इस्तीफा, अफसरों में मचा हड़कंप, थप्पड़ से शुरू हुआ था विवाद

Tue, 20 Jul 2021 07:33 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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बिजनौर में दरोगा अरुण कुमार राणा। - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में एक निलंबित दरोगा की शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो आला अफसरों पर सवाल खड़े हो गए। आखिर दरोगा को मजबूर होकर त्यागपत्र लिखना पड़ा। इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान दरोगा का त्यागपत्र सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया। वहीं त्यागपत्र वायरल होने के बाद एसपी सिटी ने निलंबित दरोगा को बहाल कर दिया।

ये था मामला
कस्बा झालू निवासी आरएसएस के खंड शारीरिक प्रमुख उमंग काकरान पिछले सप्ताह अपने पिता रामेंद्र सिंह का चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पुलिस चौकी गए थे। पुलिस चौकी पर तैनात दरोगा अरुण कुमार राणा ने रिपोर्ट लगाने से इनकार कर दिया। इस बात पर दोनों में नोकझोंक हो गई और दरोगा ने उमंग को थप्पड़ मार दिया। घटना के विरोध में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने झालू पुलिस चौकी पर हंगामा किया था। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ता सीओ सिटी कुलदीप गुप्ता से मिले थे। इसके बाद एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने दरोगा अरुण कुमार राणा को निलंबित कर दिया था।
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बिजनौर: दरोगा पर हुए हमले के मामले में जांच करती पुलिस - फोटो : amar ujala
निलंबित दरोगा पर हुआ था हमला
इसके बाद मुंह पर कपड़ा बांधे बाइक सवार तीन युवकों ने दरोगा पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया था। वहीं पीड़ित दरोगा ने इस मामले में अधिकारियों को सूचना देते हुए शिकायत की। लेकिन निलंबित दरोगा की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों के रवैये से आहत दरोगा अरुण कुमार ने सोमवार को पुलिस महानिदेशक लखनऊ, एडीजी बरेली जोन, डीआईजी मुरादाबाद को त्यागपत्र भेज दिया। भेजे गए त्यागपत्र में लिखा कि उन पर हमला करने वालों की आज तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। वह इसे लेकर सीओ सिटी, एसएचओ हल्दौर व विवेचक से मालूम करते हैं तो उन्हें कह दिया जाता है कि अभी एसपी साहब का आदेश नहीं है। उधर, सोमवार को त्यागपत्र वायरल होने के बाद एसपी सिटी ने निलंबित दरोगा को बहाल कर दिया और इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरएसएस नेता सहित दो को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि मंगलवार को दोनों आरोपियों को जमानत दे दी गई।
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दरोगा अरुण कुमार राणा। - फोटो : amar ujala
दरोगा ने लगाया था ये आरोप 
दरोगा ने आरोप लगाया था कि आरएसएस के कुछ पदाधिकारी रोज उनसे मिलकर या मोबाइल पर बात करके एसपी, सीओ सिटी का नाम लेकर समझौता करने के लिए दबाव बना रहे थे। कहते थे कि अगर आरोपी को नुकसान होगा तो दरोगा को भी नुकसान होगा। शासन, प्रशासन पर उनकी बहुत बड़ी पकड़ है। जो वे कहेंगे एसपी साहब वही करेंगे। दरोगा ने आरोप लगाया था कि सोमवार को एसएचओ हल्दौर ने फोन करके उनसे कहा कि एसपी साहब ने बुलाया है। एसएचओ हल्दौर के साथ वे एसपी से मिलने गए तो वहां पर एसपी सिटी भी आ गए। एसपी ने उनसे हंसकर कहा कि चलो अब बहुत हो गया, बहाल कर देंगे। समझौता करने के लिए उन पर दबाव बनाया। दरोगा का आरोप है कि उनके खिलाफ एक बहुत बड़ा षड़यंत्र रचा गया है। इसमें विभाग के ही कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। योजना के तहत निलंबित कराया और इसके बाद उन पर जानलेवा हमला हुआ।

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बिजनौर: घटना के बाद जांच करती पुलिस - फोटो : amar ujala
मेरी जान को है खतरा: दरोगा
दरोगा अरुण कुमार राणा अरुण ने इस्तीफे में लिखा है कि षड़यंत्र के तहत उनकी हत्या भी हो सकती है। वह मानसिक व शारीरिक रूप से टूट चुके हैं। घटना के दिन वह किराए के मकान से बाजार सब्जी व अन्य सामान खरीदने जा रहे थे। तब उमंग, पुरू, गौरव, शिवम समेत आठ लोगों ने जान से मारने के इरादे से लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से उन पर हमला किया था। भरे बाजार में सड़क पर गिराकर मारने लगे। आसपास के लोगों के इकट्ठा होने पर उन्हें अधमरा करके जान से मारने की धमकी देकर भाग गए थे।
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एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह - फोटो : अमर उजाला
एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह ने बताया कि उन पर व अन्य अधिकारियों पर जो आरोप लगाए गए हैं वे गलत हैं। उन पर कोई दबाव नहीं बनाया गया है। दरोगा पर हमला करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उनकी तलाश में पुलिस की टीम लगी हैं। दरोगा को बहाल कर दिया गया है। दो आरोपी उमंग काकरान और भोलू को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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