बरेली में अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार गुप्ता की अदालत ने वर्ष 2010 में तत्कालीन एसपी ट्रैफिक कल्पना सक्सेना पर जानलेवा हमला करने वाले तीन सिपाहियों और एक बिचौलिये को 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
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एसपी पर जानलेवा हमले के दोषियों को मिली 10-10 साल कैद की सजा
- फोटो : अमर उजाला
आईपीएस कल्पना सक्सेना को न्याय मिलने में 15 साल लग गए। तत्कालीन विवेचक ने आरोपियों पर नरमी बरतकर विवेचना में झोल रखा। दोनों ही पक्ष वर्दीवाले होने की वजह से 13 साल तक शासन से अभियोजन स्वीकृति नहीं मिल पाई।
यही वजह रही कि इस बीच निलंबित सिपाही दो बार बहाल हो गए। कल्पना सक्सेना पर हमला वर्ष 2010 में हुआ था। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई, लेकिन एसपी ट्रैफिक का तबादला होने के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई।
विवेचना के बाद उसी साल जो चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई, उसमें शासकीय अधिवक्ता ने कई झोल पाए। इस वजह से मामले की सुनवाई भी टलती रही। इसका लाभ लेकर तीनों सिपाही हाईकोर्ट जाकर दो बार बहाल हो गए। इसके बाद मामला वर्ष 2023 तक दबा रहा।
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विशेष लोक अभियोजक मनोज बाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला
विशेष लोक अभियोजक के हवाले किया केस
आईपीएस कल्पना सक्सेना ने साल 2023 में शासन को प्रार्थनापत्र देकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई। इसके बाद मुख्य सचिव ने विशेष लोक अभियोजक के रूप में मनोज बाजपेई को नियुक्त किया। एपीओ विपर्णा गौड़ को उनके सहयोग में लगाया गया। विशेष लोक अभियोजक ने मामले की धूल फांक रही फाइल को खुलवाकर विवेचक से त्रुटियां दूर कराईं। इसके बाद गवाहों के बयान कराए और साक्ष्य पेश किए गए।
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जनपद न्यायालय,बरेली
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बरेली आकर की बहस
कल्पना सक्सेना ने निजी स्तर पर भी कानूनी लड़ाई तेज की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से सहयोग मांगा। तब दिल्ली से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक अमृतांशु ने बरेली कोर्ट में आकर दूसरे पक्ष के वकीलों से बहस की। कोर्ट के सामने वह साक्ष्य रखे, जिससे घटना की भयावहता सामने आई। तब जाकर पुलिस अफसर को न्याय मिल सका।
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जानलेवा हमले के दोषी
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सजा की बारी आई तो दया की भीख मांगने लगे दोषी
न्यायाधीश जब सजा सुनाने लगे तो चारों दोषी रो-रोकर दया की भीख मांगने लगे। न्यायालय कक्ष के बाहर दोषियों के परिजन भी बिलखते रहे। हालांकि, वे आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट जाने की बात भी करते रहे। एक दोषी ने न्यायाधीश से कहा कि मैंने आपको खाटूश्याम के रूप में देखा है। मुझ पर आपकी कृपा जरूर होगी।
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अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कल्पना सक्सेना
- फोटो : अमर उजाला
न्यायपालिका का जताया आभार
दोषियों को सजा मिलने से समाज में सकारात्मक संदेश गया है। दोषी आपराधिक प्रवृति के हैं। इनको सजा देकर न्यायपालिका ने मेरे और समाज के साथ न्याय किया है। पुलिस की छवि धूमिल करने वाले ऐसे पुलिसकर्मियों की सही जगह जेल ही है। शुरू में कई साल मामला दबा रहा, पर उप्र शासन के ऑपरेशन कॉन्विक्शन की वजह से डेढ़ साल में प्रक्रिया बेहद तेज चली जो फैसले तक पहुंची। न्यायपालिका, अभियोजन से जुड़े जिम्मेदार व बरेली के मौजूदा पुलिस अधिकारियों समेत कई लोगों का सहयोग रहा है। - कल्पना सक्सेना, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, गाजियाबाद
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दोषियों को लेकर जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
एसपी ट्रैफिक पर हमला करने वाले रविंद्र और धर्मेंद्र के पिता का पुलिस ने किया था एनकाउंटर
साल 2010 में बरेली में तैनात रहीं एसपी यातायात कल्पना सक्सेना पर हमला करने वाले सिपाही रविंद्र और उसके भाई धर्मेंद्र आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं। आईपीएस कल्पना सक्सेना ने बताया कि रविंद्र और धर्मेंद्र के उपनाम भी दबंगों वाले हैं। रविंद्र को नकटिया के नाम से भी जाना जाता है।
वहीं, धर्मेंद्र को सभी टाइगर कहकर पुकारते हैं। उस दौरान अवैध वसूली करने में इनका नाम चर्चा में रहता था। फर्रुखाबाद निवासी इनका पिता मेघनाथ हिस्ट्रीशीटर था। पुलिस ने नब्बे के दशक में उसका एनकाउंटर किया था। सच मायने में ये सभी दोषी वर्दी के हकदार ही नहीं थे।
अमर उजाला अखबार में प्रकाशित घटना की खबर
- फोटो : आर्काइव
आईपीएस कल्पना सक्सेना ने बताया कि बरेली में पहली एसपी ट्रैफिक के तौर पर उनकी तैनाती हुई थी। उससे पहले बरेली में एसपी ट्रैफिक का पद नहीं होता था। उस दौरान यहां अवैध वसूली काफी बढ़ गई थी। इसे बंद कराने की मांग को लेकर शासन को लगातार पत्र भेजे जा रहे थे।
इसे देखते हुए इस पद का सृजन कर उनको पहली तैनाती दी गई थी। उन्हें स्टिंग करके अवैध वसूली करने वालों पर शिकंजा कसने के निर्देश थे। इसीलिए वह धरपकड़ अभियान चला रही थीं। इसी दौरान यह वारदात हुई थी।