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शहादत: शहीद अभिनव चौधरी के अंतिम दर्शन कर रो पड़ा पूरा गांव, फिर नम आंखों से दी विदाई, देखिए तस्वीरें

Sat, 22 May 2021 05:18 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
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शहीद अभिनव चौधरी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
शहीद अभिनव चौधरी का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके पैतृक गांव पुसार पहुंचा तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। अभिनव के अंतिम दर्शन करने के बाद पूरा गांव रो पड़ा। इस दौरान हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि परिवार का लाडला बेटा चला गया। वहीं हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीण भारत माता की जय और शहीद अभिनव चौधरी अमर रहे के जयकारे लगाते रहे। ताऊ सूबे सिंह ने अपने लाडले भतीजे की चिता को फफकते हुए मुखाग्नि दी। 

पैतृक पुसार गांव में शनिवार को जैसे ही शहीद अभिनव का पार्थिव शरीर पहुंचा तो देखने वालों की भीड़ लग गई। इस दौरान पूरा गांव शहीद अभिनव चौधरी अमर रहे के जयकारों से गूंज रहा था। वहीं घर पर कुछ देर के लिए अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को रखा गया। ग्रामीणों ने देश के सपूत को पुष्प अर्पित करते हुए श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। वहीं अंतिम यात्रा में ग्रामीण पुष्प वर्षा करते और उद्घोष करते हुए चल रहे थे। गांव के श्मशान में सैनिक सम्मान के साथ अभिनव चौधरी को अंतिम विदाई दी गई।
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बारिश में खराब हुए श्मशान के रास्ते को ग्रामीण ठीक किया

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शहीद अभिनव चौधरी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
गमगीम माहौल के बीच ही ग्रामीण अभिनव के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे थे। जिले में दो दिन पहले हुई तेज बारिश से पुसार गांव में श्मशान जाने वाला रास्ता भी काफी खराब हो गया था। शुक्रवार को जब अभिनव की मृत्यु और उनका अंतिम संस्कार पुसार में होने की जानकारी मिली तो ग्रामीण फावड़े से रास्ते को ठीक करने में जुट गए। एसडीएम दुर्गेश मिश्रा गांव पहुंचे और शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी। जिलाधिकारी राजकमल यादव ने फोन पर बात करके परिजनों को ढांढस बंधाया।
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जाट महासभा ने जताया शोक

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शहीद अभिनव चौधरी का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
जिला जाट महासभा ने अभिनव की शहादत पर शोक व्यक्त किया है। संगठन के सदस्यों ने ऑनलाइन बैठक कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मीडिया प्रभारी गजेंद्र पायल ने बताया कि अभिनव होनहार थे। बैठक में संगठन अध्यक्ष सत्यवीर सिवाच, पूर्व अध्यक्ष चौधरी कल्याण सिंह, कर्नल एसएस दूहून, रवींद्र मलिक, सतेंद्र पंवार, डीके बालियान, पवन तोमर, ब्रजपाल सिंह, विनोद कुश, हरबीर सिंह सुमन मौजूद रहे।

15 मई को मेरठ आना चाहते थे अभिनव, कोरोना के कारण पिता ने रोक दिया था

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शहीद अभिनव चौधरी काओ सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
स्क्वाड्रन लीडर अभिनव चौधरी 15 मई को छुट्टी मिलने पर मेरठ आना चाहते थे, इस संबंध में उनकी पिता सतेंद्र से बात हुई थी। लेकिन पिता ने कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते आने से मना कर दिया था। इसके बाद अब 13 जून को घर आने की बात हुई थी। पिता सतेंद्र का कहना है कि बुधवार को फोन पर उससे आखिरी बार बात हुई थी। एक-दूसरे का हालचाल पूछा था। लेकिन तब अंदाजा नहीं था कि ये बातचीत आखिरी होगी।
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अभिवन चौधरी का अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
शुक्रवार सुबह चार बजे वायुसेना के सीओ का फोन आया, उन्होंने विमान हादसे में अभिनव के शहीद होने की जानकारी दी। इसके बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। काश वह 15 मई को आ गए होते तो हादसे से बच सकते थे। इकलौते बेटे के चले जाने के गम में माता पिता के आंसू रुक नहीं रहे हैं। वह बेहद मिलनसार थे, आसपास के लोग व सभी रिश्तेदार उन्हें पसंद करते हैं। पिता सतेंद्र चौधरी ने बताया कि सितंबर 2020 में अभिनव आखिरी बार घर आया था। तब सभी रिश्तेदार व दोस्तों की खैर-खबर ली थी। अभिनव के परिजनों ने बताया अभिनव में देशभक्ति को लेकर अलग ही जुनून था। वो अक्सर व्हाट्सएप स्टेट्स पर देशभक्ति से संबंधित सामग्री पोस्ट करते थे। पड़ोस में रह रहे डॉ. विकास तोमर ने बताया कि अभिनव बचपन से ही बेहद होनहार थे। जब तक किसी चीज को सीख नहीं लेते थे, तब तक छोड़ते नहीं थे। उनकी बेटी ने बताया कि भैया बेहद प्रोत्साहन करते थे। कॅरियर को लेकर जरूरी बातें बताते थे।
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अपने पिता के साथ अनुभव चौधरी। - फोटो : amar ujala
बचपन से ही पायलट बनना चाहते थे अभिनव
अभिनव के शहीद होने की सूचना से उनके पैतृक गांव में शोक छा गया। अभिनव का परिवार फिलहाल कई वर्ष से मेरठ की गंगासागर कॉलोनी में रह रहा है। गांव में उनके बड़े भाई सूबे सिंह और छोटे भाई अरविंद का परिवार रहता है। अभिनव की मृत्यु की खबर शुक्रवार सुबह जैसे ही गांव पहुंची तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 
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अनिभव चौधरी की शादी के फोटो। - फोटो : amar ujala
अभिनव का जन्म पुसार गांव में वर्ष 1992 में हुआ था। अभिनव बचपन से ही बड़े होनहार थे। वायुसेना में पायलट बनना उनका बचपन का सपना था। माता-पिता भी यही चाहते थे। छोटी उम्र में ही अभिनव इस सपने को पूरा करने में लग गए थे। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और वर्ष 2012 में वह वायु सेना में भर्ती भी होकर अपना और माता-पिता का सपना पूरा किया। अभिनव वैसे तो वह मेरठ रहते थे, लेकिन गांव में छुट्टियों में आते थे तो सभी से जिंदादिली के साथ मिलते थे। उनके पैतृक घर पर परिवार के लोगों को सांत्वना देने ग्रामीणों का तांता लग गया। अभिनव की ससुराल बालैनी क्षेत्र के मवीकलां गांव में भी इस दर्दनाक हादसे के बाद शोक छा गया। अभिनव के ससुर मास्टर शिवकुमार उज्ज्वल मवीकलां जूनियर हाई स्कूल स्कूल में प्रधानाध्यापक हैं। फिलहाल उनका परिवार भी मेरठ में ही रह रहा है।

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अभिनव चौधरी के पिता सत्येंद्र चौधरी। - फोटो : amar ujala
इकलौते बेटे की कामयाबी को माता-पिता ने किया था संघर्ष
अभिनव का परिवार गंगासागर कॉलोनी स्थित सी-91 मकान में रहता है। यहां पिता सतेंद्र चौधरी, मां सत्या चौधरी व बहन मुद्रिका चौधरी रहती हैं। पत्नी सोनिका अभिनव के साथ रहती थीं। अपने इकलौते बेटे अभिनव को कामयाब बनाने के लिए उसकी माता सत्या और पिता सतेंद्र ने काफी संघर्ष किया। बेटे के लिए उन्होंने दुख झेले, लेकिन अभिनव को कोई तकलीफ नहीं होने दी। 
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मोगा में गिरा मिग 21- फोटो। - फोटो : amar ujala
सतेंद्र चौधरी खेती के साथ ही गांव में ही मेडिकल स्टोर चलाते थे। अभी भी गांव में उनकी खेती की जमीन है। अभिनव की पढ़ाई के लिए मां सत्या उन्हें लेकर मेरठ में किराये के मकान में अकेली रहने लगी थीं। उस समय अभिनव की उम्र बहुत कम थी। पिता सतेंद्र सप्ताह में एक बार ही मेरठ जाते थे। अभिनव की प्रारंभिक पढ़ाई मेरठ के ट्रांसलेम स्कूल से हुई। इसके बाद आरआईएमसी देहरादून से आगे की पढ़ाई पूरी की। 12वीं पास करने के बाद वह एयरफोर्स में भर्ती हो गए। उनकी ट्रेनिंग हैदराबाद में हुई थी। बाद में सतेंद्र भी मेरठ रहने लगे और प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया था। उनकी एक छोटी बेटी मुद्रिका भी है। जिस बेटे के लिए माता-पिता ने इतना संघर्ष किया वह इस तरह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चला गया। इसे लेकर परिजनों के साथ ग्रामीण भी काफी दुखी हैं। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने गंगानगर में अभिनव के परिजनों से मिलकर ढांढस बंधाया।
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