देर शाम शनि प्रदोषव्यापिनी त्रयोदशी मिलने के साथ ही कुबेर संग महालक्ष्मी की सविधि आराधना कर धन धान्य से खजाना भरने की कामना की गई। इंद्र योग के साथ त्रिपुष्कर योग में रंगोलियों, अल्पनाओं के बीच लक्ष्मी के पदचिह्न उकेरे गए। सोने, चांदी, हीरे, मोती के अलावा धन-धान्य की कामना से भूमि, भवन और वाहन की खरीददारी अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग में रविवार को भी होगी। इससे पहले त्रयोदशी लगने के साथ पंचदीप पर्व का शुभारंभ हो गया। ज्योतिपर्व दिवाली सोमवार को मनाई जाएगी।
वंदनवारों, रंग-बिरंगे फूलों,ध्वजा-पताकाओं, दीपमालाओं और द्वारों-द्वारों पर सजाई गई रंगोलियों से शनिवार को धनतेरस पर महालक्ष्मी के आगमन की खुशियां छा गईं। कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन त्रिपुष्कर योग के साथ इंद्र योग में महालक्ष्मी के दरबार सजाए गए। घरों, प्रतिष्ठानों में चावल के आंटे और रंग बिरंगे फूलों से रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक उकेरे गए। तरह-तरह की रंगोलियां सजाई जाती रहीं।