गंगा में कटान व दलदल की दुश्वारियों के बीच माघ मेला आकार लेने लगा है। संगम क्षेत्र की अधिकांश भूमि दलदल होने की वजह से इस बार नागवासुकि व झूंसी ओर दो किमी तक मेले का विस्तार करना पड़ा है। आचार्यबाड़ा, दंडी स्वामी नगर और खाक चौक के साधु-संतों के शिविरों के निर्माण अंतिम दौर में पहुंच गए हैं। त्रिवेणी मार्ग के उत्तर पटरी पर द्वारका-शारदा और ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिविर का भी निर्माण आरंभ हो गया। इसी के साथ कल्पवासियों के भी आने का सिलसिला शुरू हो गया है। अधूरी तैयारियों केबीच माघ मेला 10 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर प्रथम स्नान से आरंभ होकर महाशिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व 21 फरवरी तक चलेगा।
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- फोटो : प्रयागराज
पांच सेक्टरों में माघ मेला बसने के अंतिम दौर में है। अभी न तो हर सेक्टर तक पहुंचने के लिए मार्ग तैयार हो रहे हैं। बिजली व्यवस्था का कार्य भी अभी जारी है। ज्यादातर इलाकों में दलदल होने की वजह से जल निगम के अभियंता पेयजल पाइप लाइनों को भी बिछाने में पिछड़ गए हैं। कटान व दलदल केचलते संगम क्षेत्र समेत अक्षयवट मार्ग, महावीर मार्ग, त्रिवेणी मार्ग पर भूमि कम होने की वजह से करीब दो किमी तक उत्तर की ओर मेले का विस्तार करना पड़ा है।
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तीर्थपुरोहितों, कल्पवासियों के अलावा अन्य आध्यात्मिक संस्थाओं को ओल्ड जीटी के उत्तर ही बसाया जा रहा है। इस बीच झूंसी से लेकर ओल्ड जीटी, शास्त्री पुल के बीच मेले की रंगत दिखने लगी है। साधु-संतों, कल्पवासियों के लिए संगम तट पर महीने भर के जप, तप, ध्यान के लिए तंबुओं की नगरी का स्वरूप अब दिखने लगा है। शिविरों में रोजमर्रा की जिंदगी की गाड़ी हांकने का सिलसिला शुरू हो गया। सेक्टरवाइज दुकानें भी खुल गई हैं। बृहस्पतिवार को सैकड़ों की तादाद में कल्पवासी साजो सामान केसाथ अपने शिविरों में पहुंच गए।
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शिविरों को बसाने में संतों-भक्तों को मुश्किलें
साधु-संतों, भक्तों व कल्पवासियों की परेशानी दलदल केचलते बढ़ती जा रही है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी महासभा (दंडीबाड़ा) के सचिव ब्रह्माश्रम महाराज ने ओल्ड जीटी के उत्तर अपने शिविर में डेरा डाल दिया है। उन्होंने बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। दंडी स्वामी नगर में सौ से अधिक शिविर तैयार हो चुके हैं। स्वामी ब्रह्माश्रम ने बताया कि दद केचलते शिविरों को बसाने में जबरदस्त दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार रेत दलदल भूमि पर पाटी जा रही है। उन्होंने बताया कि लंबे समय बाद ऐसी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। उधर, प्रयागवाल सभा के राजेंद्र पालीवाल ने भी कई क्षेत्रों में दलदल के चलते भूमि कम पड़ने और कल्पवासियों को संगम से काफी दूर बसाने पर चिंता जताई।
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प्रमुख सचिव वित्त ने विभाग में देखी कार्य संस्कृति
प्रमुख सचिव वित्त भुवनेश कुमार ने बृहस्पतिवार को संगम प्लेस स्थित लोकल फंड ऑडिट विभाग कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने फाइलों के रखरखाव, काम करने के तरीके आदि को देखा और कर्मचारियों से जानकारी ली। उन्होंने पुराने मामलों के तत्काल निस्तारण का निर्देश दिया। प्रमुख सचिव माघ मेले में भी गए तथा बड़े हनुमान, अक्षयवट और पाताल पुरी का दर्शन किया।
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सड़क पर नहीं बनेंगे संतों के शिविर के प्रवेश द्वार
संतों के विशालकाय प्रवेश द्वार इस बार सड़क पर नहीं बन सकेंगे। सुरक्षा का हवाला देते हुए मेला प्रशासन ने इस तरह के सभी प्रवेश द्वार हटाने के लिए कहा है। इससे भक्तों में नाराजगी है। माघ मेले में प्रमुख संस्थाओं के प्रवेश द्वार मुख्य मार्ग पर बनते रहे हैं। इस बार भी कई संस्थाओं की ओर से प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। अयोध्या के श्री मणिराम दास छावनी की ओर से भी दो विशाल प्रवेश द्वार अक्षयवट और महावीर मार्ग पर बनाए गए हैं। इसके विपरीत कई प्रमुख मार्ग पर विज्ञापन की भी बुकिंग की गई है। इसके अलावा सुरक्षा की दृष्टि से भी प्रवेश द्वार बनाए जाने पर रोक लगाई गई है। इसी क्रम में एसडीएम तथा अन्य प्रशासनिक अफसरों ने बृहस्पतिवार को मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने मणिराम छावनी के संतों से भी दोनों प्रवेश द्वार हटाने के लिए कहा। जबकि, संतों का कहना है कि वहां कई वर्षों से गेट बनते रहे हैं। इसे लेकर विवाद भी हुआ। प्रभारी मेलाधिकारी रजनीश मिश्र का कहना है कि अवैध रूप से बने प्रवेश द्वार हटाए जाएंगे। इसके लिए संस्थाओं से कह दिया गया है।
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जंक्शन से मेले के लिए शुरू हुई बस सेवा
शहर से माघ मेले के लिए सिटी बस सेवा बृहस्पतिवार को शुरू हो गई। अभी जंक्शन से मेला क्षेत्र में हरिहर आरती स्थल तक बस सेवा शुरू की गई है। मेला शुरू होने के साथ इसमें विस्तार किया जाएगा। शहर से पूरे मेला क्षेत्र के लिए सिटी बस चलाने की योजना है। जंक्शन से मेला के लिए पहले दिन दो बसें चलाई गईं। चूंकि अभी मेला बस रहा है। अभी सड़कें भी बन रही हैं। इसलिए हरिहर आरती स्थल तक ही बस सेवा शुरू की गई है। माघी पूर्णिमा के साथ 10 जनवरी से माघ मेले की शुरुआत होगी। ऐसे में सात-आठ जनवरी से मेले के लिए भीड़ आने की बात कही जा रही है। इसके बाद बसों की संख्या तथा दूरी बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
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बस से लखनऊ का सफर 21 से 53 रुपये हुआ महंगा
रेल के बाद बस सेवा भी शुक्रवार से महंगी होने जा रही है। हर श्रेणी के बसों के किराए में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। नए दर के अनुसार लखनऊ का सफर 21 से 53 रुपये तक महंगा हो जाएगा। वहीं वाराणसी का 12 ये 20 तथा कानपुर का 22 से 37 रुपये तक महंगा हो जाएगा।
स्थान बस का प्रकार पुराना किराया नया किराया
लखनऊ साधारण 226 247
एसी 3*2 317 344
एसी 2*2 360 397
डिलक्स 510 563
कानपुर साधारण 230 252
एसी 3*2 312 349
वाराणसी साधारण 133 145
एसी 3*2 197 217
गोरखपुर साधारण 294 325
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पिछड़ी तैयारी, कल्पवासियों की बढ़ेगी मुसीबत
माघ मेले में आने वाले कल्पवासियों को इस बार परेशानी उठानी पड़ सकती है। जमीन के विवाद में अभी टेंट तक नहीं लगे हैं। शौचालय आदि का निर्माण इसके बाद शुरू होगा। जबकि , मेला शुरू होने में मात्र एक सप्ताह का समय शेष है। माघी पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास की शुरुआत 10 जनवरी से हो जाएगी। इसके विपरीत माघ मेले में की तैयारी अभी चकर्ड प्लेट बिछाने, बिजली का पोल लगाने आदि तक सीमित है। प्रशासनिक कार्यालयों के लिए टेंट आदि लगने हैं, लेकिन संतों और कल्पवासियों के शिविर बनाने का काम अभी शुरू नहीं हुआ है। आलम यह है कि अभी प्रयागवाल को मिलने वाली जमीन को लेकर ही विवाद है। बृहस्पतिवार को काली मार्ग पर वितरण किया गया, लेकिन जमीन कम पड़ गई। अब शुक्रवार को आवंटन होगा। इसके अलावा प्रयागवाल को त्रिवेणी, महावीर और अक्षयवट मार्ग पर भी जमीन नहीं मिली है। जबकि, माघ मेले में आने वाले ज्यादातर कल्पवासियों के शिविर प्रयागवाल की जमीन में लगते हैं। प्रयागवाल के राजेंद्र पालीवाल का कहना है कि सात जनवरी से ही कल्पवासियों का आना शुरू हो जाएगा लेकिन तैयारी नहीं है। जो स्थिति है उसमें 10 जनवरी से पहले जमीन का आवंटन हो पाना ही मुश्किल है। ऐसे में कल्पवासियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। यही स्थिति कई अन्य संस्थाओं की जमीन को लेकर भी है।
मेला में भूमि आवंटन पर बढ़ी रार, अनशन पर संत
माघ मेला क्षेत्र में भूमि आवंटन को लेकर विवाद बढ़ गया है। जमीन नहीं मिलने से नाराज संत हितकारिणी हृदय नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत अंबुज कुमार पांडेय ने बृहस्पतिवार से मेला प्रशासन कार्यालय के सामने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनके साथ कथा वाचक विलोचना नंद, दूधनाथ शास्त्री ओ स्वामी दीनानंद भी अनशन में शामिल हैं। महंत अंबुज का कहना था कि वह कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है। पांच जनवरी को भूमि आवंटन की बात कही जा रही है, लेकिन कहां जमीन मिलेगी इस बारे में कोई भी बताने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने जमीन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा की।
जमीन तय नहीं भटक रहे ‘विस्थापित’
कटान तथा दलदल की वजह से प्रमुख मार्गों पर जमीन कम हो गई है। त्रिवेणी, काली, महावीर तथा अक्षयवट मार्ग पर यह गंभीर समस्या है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में संस्थाओं को दूसरे स्थान पर जमीन देने का निर्णय लिया गया है लेकिन इस बारे में सही जानकारी नहीं मिलने की वजह से संस्था के लोग भटकने के लिए मजबूर हैं। पूर्व में इन मार्गों पर बसने वाली संस्थाओं को सेक्टर पांच या अन्य स्थानाें पर भेजा जा रहा है। इसके विपरीत संबंधित सेक्टर प्रभारियों को इसकी कोई सूचना नहीं है। ऐसे में विवाद बढ़ने के साथ लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है।