विलाप करते परिजन और ग्रामीण
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उधर, खून से लथपथ रचना जमीन पर पड़ी हुई थी, जिसके गले के साथ ही चेहरे पर धारदार हथियार से हमले के निशान थे। हत्यारों की क्रूरता देख ग्रामीण कांप उठे तो पुलिसकर्मी भी स्तब्ध थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घर के भीतर के जो हालात थे उससे यही लग रहा था कि वैद्य के बेटे व दोनों बेटियों को तो चारपाई से उठने का भी मौका नहीं मिला।