महीने भर बाद सोमवार को शर्तों के साथ काम शुरू हुआ तो महीने भर से घर बैठे मजदूरों को संजीवनी मिल गई। नमक-आटा जुटाने का रास्ता खुल गया। बीएसएनएल और यूपीपीसीएल, पीडब्ल्यूडी समेत अन्य क्षेत्रों में जिन मजदूरों के खाली हाथों को काम मिला, उनके चेहरे खिल गए। निर्माण कार्यों की छूट मिलने पर घरों के ठप पड़े काम भी लोगों ने शुरू करा दिए। सड़कों और मोहल्लों में खटर-पटर के साथ महीने भर से ठहरे जीवन को एकबारगी रफ्तार मिल गई है।
लॉकडाउन में महीने भर से घर बैठे करेली के मुन्ना जमादार और हनुमानगंज के सुभाष के पास सोमवार की सुबह बीएसएनएल के ठेकेदार की ओर से काम के लिए फोन पर बुलावा आया तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सुभाष और मुन्ना फावड़ा, गैंता और खंचिया लेकर निकल पड़े। सुभाष ने बताया कि काम न मिलने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी तय हुई है।