माघ मेले से पहले शहर एक और मेले के आनंद में डूबा। चार दिनी सूर्यषष्ठी व्रत के तीसरे दिन बुधवार को डाला छठ पर न सिर्फ संगम बल्कि सलोरी, अरैल, रामघाट, बलुआघाट, गऊघाट, द्रौपदी घाट, बरगदघाट और करेलाबाग के सुब्बनघाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। ज्यादातर रास्ते घाटों की ओर मुड़े। दोपहर के बाद से ही घाटों की ओर जाने और सूरज के डूबने के बाद लौटने से सड़कें श्रद्धालुओं से ही भरी रहीं। घर से लेकर घाटों तक छठी माई की महिमा के गीत गूंजते ही रहे। पूरे शहर में मेले जैसा माहौल रहा।
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Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं।
- फोटो : प्रयागराज
मंगलगीतों के बीच पति एवं बेटे की मंगलकामना के लिए बड़ी संख्या में घाटों पर पहुंचीं महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया। घाट पर कमर या घुटने भर पानी में खड़ी होकर महिलाओं ने आंचल में सजा हुआ डाला लेकर अस्ताचलगामी यानी डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया और बेटे एवं पति की मंगलकामना के लिए आशीष मांगा। इससे पहले घाट किनारे ईखें जोड़ीं गईं और मिट्टी को लीपकर वेदी बनाई गई। संगम पर यमुना पट्टी से लेकर गंगा पट्टी तक व्रती महिलाओं की कई-कई कतारें लगीं। जिसे जहां जगह मिली, उसने वहीं पूजा की वेदी बनाई। मंगलगीतों के बीच कलश स्थापना के बाद धूप, दीप, नैवेद्य, फल चढ़ाकर सूर्यदेव पूजे गए। दीप जलाकर आरती उतारी गई।
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Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं।
- फोटो : प्रयागराज
मुख्य मेला संगम के रेती पर लगा। दोपहर से लेकर शाम तक तो घाट की ओर जाने वाले रास्तों पर जाम जैसी स्थिति बनी रही। बलुआघाट में तो स्थिति यह थी कि चौराहे से घाट तक पैदल पहुंचना भी मुश्किल रहा। अबकी बरगद घाट और सुब्बन घाट पर भी खूब भीड़ जुटी। भीड़ की आशंका से ही हर कोई घाट पर जल्दी से जल्दी पहुंचने के लिए बेताब रहा। अनेक व्रती महिलाएं तो दोपहर से ही पहुंचकर घाटों पर पूजा की तैयारियों में जुट गईं। उनके साथ पति तथा बेटे सहित परिवार के अन्य सदस्य भी पूजा को आए। परंपरा के अनुसार डाला तो पुरुष ही सिर पर उठाकर घाट तक लाए और पूजा के बाद वही डाला लेक र घर गए।
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Prayagraj News : डाला छठ पर संगम तट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं।
- फोटो : प्रयागराज
अधिकतर व्रती महिलाओं ने पूजा के लिए नए कपड़े पहने लेकिन कई महिलाओं ने शादी वाला जोड़ा भी निकाला। ओढ़नी, चुन्नी के साथ पूरा साज-सिंगार भी शादी वाले जैसा ही रहा। वहीं घर पर कई तरह के पकवान बनाए गए, जिसकी तैयारियां सुबह से ही जारी रहीं। वैसे उत्साह ऐसा रहा कि व्रत के बावजूद व्रतियों के चेहरे पर आस्था की दमक बनी ही रही, परिवार के साथ भी उत्साह के साथ उनका हौसला बढ़ाते रहे। खास यह भी कि वे महिलाएं भी पूजा में उनके संग शामिल हुईं, जिन्होंने स्वयं तो व्रत नहीं रखा था लेकिन उनकी मनौती दूसरी व्रती महिला पूरी कर रही थी।
जलता हुआ ही दीपक लेकर लौटे घर
सजे सूप के अगले हिस्से में मिट्टी का जलता हुआ दीपक रखा गया जो पूजा के बाद भी जलता हुई ही घर तक लाया गया। डाला में गाजर, नीबू, नारियल, पत्ते वाली हल्दी, फल, गागल, अदरक, शरीफा, मुसम्मी, कन्ना, गन्ना, मूली आदि के अतिरिक्त मिठाई और सुहाग की चीजें भी रखी गईं। किसी ने बांस तो किसी ने तांबे का सूप या डाला ले रखा था।
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Prayagraj News : बलुआ घाट पर पूजन करतीं व्रती महिलाएं।
- फोटो : प्रयागराज
इन मान्यताओं से भी हुई पूजा
डाला छठ व्रत को लेकर व्रती महिलाओं में कुल, परिवार और क्षेत्र के मुताबिक अलग-अलग परंपराएं रहीं। कई व्रती महिलाओं ने मनौती के मुताबिक अपना पैसा न खर्च करके कई घरों से भीख मांग कर ही पूजा की सामग्री जुटाकर पूजा की। व्रतियों के मुताबिक एक बार व्रत रखने के बाद इसे खंडित नहीं किया जाता है। कहते हैं, खंडित होने से परिवार पर अनेक प्रकार की विपदाएं आती हैं। इसीलिए यदि व्रत की निरंतरता संभव न हो तो किसी परिचित महिला को ही पूजा सामग्री देकर मनौती या व्रत का संकल्प पूरा कराया जाता है।
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Prayagraj News : पूजन सामग्री की टोकरी सिर पर रखकर संगम तट की ओर जाते श्रद्धालु।
- फोटो : प्रयागराज
लेटकर ही पूरा किया घर से घाट तक का रास्ता
अपनी मनौती के अनुसार अनेक व्रती महिलाओं ने घर से घाट तक का सफर लेटकर ही पूरा किया। दोनों हाथ जोड़कर लेटने के बाद, साथ रहे लोग निशान बना देते थे, फिर व्रती महिला उस रेखा से आगे लेटती थी। बलुआघाट में बाबा समाजसेवी संस्थान के संयोजक सतीश केसरवानी तथा कार्यकर्ताओं ने ऐसी महिलाओं के लिए भीड़ में रास्ता बनाया।
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Prayagraj News : डाला छठ पर पूजन के बाद सिंदूर लगवाती व्रती महिला।
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नाक से माथे तक दमकता रहा सिंदूर
व्रती महिलाओं ने परंपरानुसार ‘नाक से माथे तक सिंदूर’ लगाया जिससे उनका चेहरा दमकता रहा। संगम पर पूजा के लिए आईं बलिया की सुचरिता बोलीं, बिहार में मेरे ससुराल में मांगलिक अवसरों पर ऐसे ही सिंदूर लगाने का रिवाज है। बिहार से जुड़ीं ज्यादातर व्रती महिलाएं ‘नाक से माथे तक’ ही सिंदूर लगाती हैं।
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Prayagraj News : संगम तट पर पूजन के लिए जाते श्रद्धालु।
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समाजसेवी संस्थाओं ने संभाली व्यवस्था
सूर्यषष्ठी व्रत पर स्वयंसेवी संस्थाओं ने अलग-अलग घाटों की व्यवस्था संभाली। संगम पर पूर्वांचल छठ एवं विकास समिति की ओर से अजय राय, बलुआघाट पर बाबा समाजसेवी संस्थान के सतीश केसरवानी, बरगद घाट पर अभिषेक ठाकुर, सुुमित श्रीवास्तव की देखरेख में स्वयंसेवक व्यवस्था में जुटे रहे। स्वयंसेवकों ने घाटों पर साफ-सफाई की व्यवस्था से लेकर व्रती परिवारों का सहयोग भी किया।
Prayagraj News : संगम तट पर पूजन करती महिलाएं।
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उगते हुए सूर्य को अर्घ्य आज
व्रती महिलाओं ने जहां बुधवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया, वहीं बृहस्पतिवार की सुबह उदय होते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाएगा। इस दूसरे अर्घ्य के बाद ही व्रत को पूर्णता मिलेगी। व्रती महिलाएं घाट से घर लौटकर बड़े-बूढ़ों के पांव छूने के बाद कोई मीठी चीज खाकर पारण करेंगी।