उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. आस्था अग्रवाल की मौत मामले में पुलिस को बड़े सबूत हाथ लगे हैं। मेडिकल ऑफिसर डॉ. आस्था अग्रवाल की हत्या में पति के साथ मौका-ए-वारदात पर तीन लोग और मौजूद थे। इस बात के ठोस सुराग पुलिस को मिले हैं। इन सुरागों के आधार पर पुलिस ने कुछ संदिग्ध उठाए हैं और अरुण सहित अन्य आरोपियों की लोकेशन भी मिल गई है। इसी क्रम में ताबड़तोड़ दबिश दी जा रही हैं। रमेश विहार में रहने वाली स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर तैनात डॉ. आस्था अग्रवाल का शव 13 अक्तूबर को उनके घर में फंदे पर लटकता मिला था। बाद में पता चला कि मंगलवार रात पति अरुण से झगड़े के बाद उनकी गला दबाकर हत्या की गई और घटना को आत्महत्या दर्शाने के लिए इस तरह शव लटकाया गया। आस्था की बहन की ओर से दर्ज मुकदमे के आधार पर पुलिस ने उसी दिन से अरुण की तेजी से तलाश शुरू कर दी। कासिमपुर पावर हाउस में राधिका ऑक्सीजन प्लांट के संचालक अरुण और आस्था को लेकर पुलिस ने जब जांच शुरू की तो इस घटना में तमाम रहस्य उजागर होते चले गए।
विज्ञापन
2 of 7
Dr Aastha Aggarwal death case
- फोटो : अमर उजाला।
पांच दिन पहले ही शुरू कर दी थी साजिश
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में सामने आया कि अरुण ने करीब पांच दिन पहले इस वारदात की साजिश रचना शुरू किया। इसी क्रम में उसने अपने प्लांट से दो तीन दिन पहले ही आनन-फानन माल बेचा है। अपने साथ तीन अन्य लोगों को आस्था की हत्या के लिए तैयार किया।
विज्ञापन
3 of 7
dr agrawal
- फोटो : अमर उजाला
वारदात के वक्त वे तीन लोग भी घर में ही थे। हालांकि, पुलिस को यह भी स्पष्ट हो गया है कि वे तीन लोग कौन थे। मगर पुलिस उनकी गिरफ्तारी होने तक इस तथ्य पर पर्दा डाले हुए है। झगड़े के दौरान बच्चों को दूसरे कमरे में बंद किया गया और फिर आस्था को मौत के घाट उतारा गया। इसके बाद आरोपियों ने घटना को आत्महत्या दर्शाने के लिए शव फंदे पर लटका दिया था।
4 of 7
Dr Aastha Aggarwal death case
- फोटो : अमर उजाला
चार टीमें दे रहीं दबिश
हत्या के बाद अरुण बच्चों को लेकर पहले कासिमपुर प्लांट की ओर भागा। मगर बाद में बच्चों को अपने भाई के घर छोड़कर दिल्ली की ओर गया। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस को अरुण व उसके साथियों की सटीक लोकेशन मिल गई है।
विज्ञापन
5 of 7
पूछताछ करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
इस आधार पर पुलिस की चार टीमें अलग-अलग शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली और अपने जिले में रविवार देर रात तक दबिश दे रही थीं। संकेत हैं कि पुलिस गिरफ्तारी व खुलासे के बेहद करीब है। सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय इतना ही बताते हैं कि इस वारदात में काफी कुछ हाथ लग गया है। जल्द खुलासा कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
6 of 7
जांच करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
लगता है बच्चों को डराया, इसलिए ज्यादा नहीं बोले
अब तक जो साक्ष्य पुलिस को मिले हैं और जो बातें बच्चों ने बताई हैं। उनमें काफी कुछ मिलान तो है, मगर बच्चों ने घर में घटना के समय तीन अन्य लोगों के होने की बात छिपाई है। इससे पुलिस मान रही है कि बच्चों को इतना डराया गया कि वे कुछ बताने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
इसे लेकर पुलिस का मानना है कि गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के बयान के आधार पर बच्चों से एक बार फिर पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। बच्चों को सही बोलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। हो सकता है कि बच्चों के बयान से तथ्यों का स्पष्ट मिलान हो जाए।