उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना में बाढ़ से हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाके जलमग्न हैं। 100 से अधिक काॅलोनियां पानी में डूबी हुईं हैं। सड़कों से लेकर स्मारकों तक पानी ही पानी नजर आ रहा है।
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बाढ़ से तबाही की तस्वीरें।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा में यमुना की बाढ़ से तबाही शुरू हो गई है। मंगलवार सुबह फाउंड्री नगर में पानी के बहाव से मकान ढह गया। सोमवार रात बल्केश्वर में महालक्ष्मी मंदिर की दीवार ढह गई थी। मंगलवार शाम 7 बजे यमुना वॉटर वर्क्स पर खतरे के निशान से ढाई फीट ऊपर बह रही है। गोकुल बैराज से सुबह 8 बजे 1.58 लाख क्यूसेक पानी नदी में प्रवाहित किया गया है।
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उफान के चलते गांव में चल रही नाव।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मंगलवार को मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने हालात देखे। कैलाश मंदिर पर प्रभावित लोगों से बात की। फिर बल्केश्वर स्थित आईटीआई में बने बाढ़ राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से मिले। उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। वाटर वर्क्स पर यमुना का जलस्तर 501.5 फीट है। पिछले 24 घंटे में चार इंच जलस्तर बढ़ा है।
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यमुना में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ का पानी कॉलोनी, गली-मुहल्लों से लेकर खेत-खलिहानों में भरने के कारण जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि रुक गई है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार सुबह 8 बजे हथिनीकुंड बैराज से 37,159 क्यूसेक, ओखला बैराज से 75,662 क्यूसेक और गोकुल से 1,58479 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व शुभांगी शुक्ला के अनुसार यमुना जलस्तर स्थिर है। बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आपदा नियंत्रण दल उपलब्ध हैं।
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बाढ़ के चलते मरीज को ऐसे लाने को मजबूर ग्रामीण।
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गदपुरा में यमुना का बांध टूटा
गांव गदपुरा में ग्रामीणों और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से तैयार किया गया यमुना का बांध मंगलवार की रात को टूट गया। जिससे गांववालों में हड़कंप मच गया। बांध से सटे 8 से 9 परिवारों के घरों में यमुना का पानी भर गया। मौके पर नायब तहसीलदार हरी लाल चौधरी व किसान नेता विपिन यादव ने बुल्डोजर बुलाकर टूटे बांध को सही कराया।
गांव से घरों तक पानी भरने से लोग सहम गए। ग्रामीण सामान लेकर बच्चों के साथ सुरक्षित स्थान पर गए। वहीं, गांव का बांध टूटने की सूचना पर एसडीएम सुमित कुमार सिंह, तहसीलदार देवेंद्र प्रताप भी राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। यमुना में आए उफान के चलते क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। बाढ़ से प्रभावित परिवारों को प्रशासन सुरक्षित स्थान पर भेजने में लगा है।
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आगरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महताब बाग में पर्यटकों का प्रवेश बंद
यमुना में आई बाढ़ से नदी किनारे खड़े संरक्षित स्मारकों को क्षति की आशंका है। मंगलवार को महताब बाग और ताज व्यू प्वाइंट पानी में डूब गए। दोनों जगह पर्यटकों का प्रवेश बंद कर दिया गया है। इसके अलावा एत्माउद्दाैला स्मारक के यमुना की तरफ बने 12 कमरों और आगरा किले की खाई में पानी भर गया है। ताजमहल पश्चिमी गेट की पार्किंग का रास्ता जलमग्न हो गया है। शहर की 100 से ज्यादा काॅलोनियां डूबी हैं। हजारों लोग राहत शिविरों और अपने परिचितों के घर शरण ले रहे हैं।
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आगरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ के कारण यमुना ताजमहल की दीवार को छूकर बह रही है। ताज के पिछले हिस्से में बना गार्डन डूब चुका है। दहशरा घाट पर पर्यटकों का प्रवेश बंद है। रास्ते में पानी भरा है। ताजमहल की खान-ए-आलम नर्सरी में भी बाढ़ का पानी भर गया है। संवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को स्मारकों में बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे के लिए यमुना का जलस्तर घटने का इंतजार है। उधर, ताजमहल आने वाले पर्यटकों की संख्या भी मंगलवार को घट गई। बाढ़ का पानी यमुना किनारा रोड पर भरा है।
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आगरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यमुना एक्सप्रेस-वे और लखनऊ एक्सप्रेस-वे से आने वाले पर्यटकों के लिए ताजमहल, आगरा किला जाने का यही रास्ता है। यहां स्ट्रेची ब्रिज के नीचे चार फीट तक जलभराव है जिसमें पर्यटकों के वाहन पानी में डूब रहे हैं।
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आगरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
महताब बाग का रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है, जबकि ताज व्यू प्वाइंट का संचालन आगरा विकास प्राधिकरण करता है। दोनों विभागों ने पर्यटकों का प्रवेश फिलहाल रोक दिया है। महताब बाग में भारतीय पर्यटक के लिए टिकट 20 रुपये, जबकि विदेशी पर्यटक के लिए 200 रुपये टिकट है।
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आगरा में बाढ़।
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यह स्मारक सुबह 6 से शाम 6 बजे तक खुलता था। शुक्रवार को ताजमहल बंद रहने के कारण बड़ी संख्या में यहां पर्यटक पहुंचते हैं। ताज व्यू प्वाइंट से ताजमहल का नजारा बेहद खूबसूरत होता है। ताज व्यू प्वाइंट पर भारतीय पर्यटक का टिकट 50 रुपये और विदेशी पर्यटक का टिकट 200 रुपये है। दोनों स्मारक डूबने से विभागों को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है।
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आगरा में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ में ढह गया था जोहरा बाग
यमुना किनारे स्थित संरक्षित स्मारक जोहरा बाग 2023 में यमुना में आए उफान और बारिश के कारण ढह गया था। जोहरा बाग की एक मंजिल ध्वस्त होकर गिर पड़ी थी। रखरखाव व संरक्षण में लापरवाही के कारण संरक्षित स्मारक खंडहर में तब्दील हो गया था। उधर, महताब बाग स्थित ग्याराह सीढ़ी पार्क में भी पानी भर गया है। आगरा किला की खाई में चार फीट पानी है। मंटोला नाला उल्टा बहने के कारण यमुना का पानी आगरा किले की खाई में भर रहा है।
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मोक्षधाम में भरा पानी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मोक्षधाम में नहीं चिताएं जलाने को जगह
आगरा में बाढ़ की विभीषिका में मोक्षधाम डूब गए हैं। विद्युत शवदाह गृह बंद है। ऐसे में माैत के बाद अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार करने के लिए भी लोगों को जगह नहीं मिल रही है। मंगलवार को पोइया घाट पर मोक्षधाम में पानी भरने के कारण लोगों को सड़क पर चिताएं जलानी पड़ीं।
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मोक्षधाम में भरा पानी।
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पोइया घाट पर खासपुर, जगनपुर, सिकंदरपुर, दयालबाग, स्वामीबाग सहित 50 से अधिक गांव व कॉलोनियों के लोग अंतिम संस्कार करने के लिए आते हैं। चार दिन से मोक्षधाम में पांच फीट पानी भरा है। चिता स्थल भी डूब गए हैं। सूखी लकड़ी तक मुहैया नहीं हो पा रही हैं। मंगलवार को हीराबाग निवासी एक परिवार अपने स्वजन का अंतिम संस्कार के लिए अर्थी लेकर मोक्षधाम पहुंचे, लेकिन पानी भरा देख वापस लौट आए। भगवान टॉकीज स्थित एक टाल से लकड़ी मंगाई। फिर सड़क किनारे चिता सजाई। शव का अंतिम संस्कार किया।
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हादसे का शिकार हो रहे लोग।
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खासपुर निवासी राम सिंह ने बताया कि मोक्षधाम में पानी भरने के कारण अंतिम संस्कार के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में लोग रास्तों और खेतों पर दाह संस्कार करने के लिए मजबूर हैं। उधर, ताजगंज मोक्षधाम में 15 से अधिक चिता स्थल डूब गए हैं। यहां भी पांच फीट पानी भरा है। चिता जलाने को स्थान नहीं। रास्ते तक में पानी भरा है।
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सड़कों पर बाढ़ का पानी।
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यहां रोज औसतन 20 से 25 शव अंतिम संस्कार के लिए आते थे, लेकिन पानी भरने के कारण एक या दो शव ही पहुंच रहे हैं। उन्हें भी मोक्षधाम के रास्ते में ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। ताजगंज के मोक्षधाम और विद्युत शवदाह ग्रह के रास्ते पर पानी भर गया। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने विद्युत शवदाह ग्रह पर होने वाले अंतिम संस्कार बंद कर दिए। लोग खुले मैदान में अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।
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सड़कों पर बाढ़ का पानी।
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बाढ़ से बरौली अहीर क्षेत्र के 102 परिवार हुए बेघर
यमुना की बाढ़ से ब्लॉक क्षेत्र के गांव मेहरा नाहरगंज, नगला तलफी, बुढ़ाना, तनौरा नूरपुर, बरौली गुर्जर, पारौली, सरगन खेड़ा, नगला जामुनिया, गढ़ी रामफल आदि गांवों का संपर्क पूरी तरह से टूट चुका है। क्षेत्र के 102 परिवारों के करीब 345 लोग बेघर हो गए हैं। घरों में पानी भर गया है।
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यमुना में बाढ़।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पर्यटन स्थलों पर घटे सैलानी
बाढ़ का असर प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से अब ऐतिहासिक धरोहरों पर पड़ना शुरू हो गया है। एत्माउद्दाैला के कमरों में पानी भरने से वहां की दीवाराें को नुकसान पहुंच सकता है। मेहताब बाग को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। आगरा किला और ताजमहल में भी पिछले कुछ दिनों की तुलना में पर्यटकाें की संख्या में खासी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को ताजमहल में 12 हजार पर्यटक पहुुंचे। यह सामान्य दिनों की तुलना में आधे थे। इसी तरह आगरा किला देखने के लिए भी महज 37 सौ पर्यटक पहुंचे। एएसआई के अधिकारी फिलहाल बाढ़ का पानी घटने का इंतजार कर रहे हैं। ब्यूरो
ताजमहल तक पानी ही पानी।
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टापू बने बटेश्वर मंदिर और बस्तियां
बटेश्वर यमुना की बाढ़ की कैद में है। शिव मंदिर शृंखला और गांव की बस्तियां टापू बन गई हैं। बटेश्वर के पास के 9 गांव भी बाढ़ में घिर गए हैं। मुश्किल में पड़ी आबादी के लिए मंगलवार को नाव चलाई गई। बाढ़ की चपेट में आए 44 मंदिरों में शिवलिंग डूब गए है। डूबे हुए घाट पर 5 से 6 फीट तक भरा पानी बटेश्वर गांव की ओर बह रहा है। वहीं, बटेश्वर के पास बसे बुढैरा, भौर, स्याइच, कलींजर, मोरहारी, शौरीपुर, टोका और उस पार बसे कल्यानपुर, भरतार गांव चारों तरफ पानी से घिर गए हैं। रास्तों से लेकर बस्ती की गलियाें में पानी भर गया है। गांवों में बीमार लोगों के इलाज, खाने पीने के सामान के लिए ग्रामीण चिंतित हैं। जोखिम उठा कर जलमग्न रास्तों से निकलने को लोग मजबूर भी हैं।