आगरा में न घर से कूड़ा उठा, न डलाबघर खत्म हुए। नालों और सड़कों पर कचरे के ढेर लगे रहे। चमड़े की कतरनें नालों को जाम करती रही, लेकिन सफाई सुधारने के नाम पर केवल डस्टबिन बांट दिए गए। ताजमहल और किले जैसी विश्व धरोहरों के सामने कचरे के पहाड़ और सिल्ट शहर की छवि धूमिल करती रही, लेकिन नगर निगम की सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं आया, जिसका खामियाजा स्वच्छ सर्वेक्षण में शनिवार को उठाना पड़ा, जब स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 की घोषणा की गई।
आगरा देश भर के नगर निगमों की रैंकिंग में फिसलकर 24 वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि बीते साल 16 वें स्थान पर था। प्रदेश में आगरा को पछाड़कर कानपुर और गाजियाबाद आगे हो गए। प्रदेश में लखनऊ, गाजियाबाद और कानपुर के बाद आगरा चौथे नंबर पर रहा, जबकि बीते साल आगरा प्रदेश में दूसरे नंबर पर था।
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कूड़ा-कचरे से भरे कूड़ेदान
- फोटो : अमर उजाला
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन हुआ फेल
शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन घोटाले के बाद बीते साल पांच जनवरी 2020 को कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने के साथ करार खत्म किया गया। तब से अब तक 22 माह में नगर निगम अपने संसाधनों और सफाई कर्मियों से डोर टू डोर कूड़ा उठवा रहा था, लेकिन यह 40 फीसदी से ज्यादा कभी नहीं हो पाया। 60 फीसदी घरों का कचरा डलाबघरों और डस्टबिन के अलावा नालों में बिखरता रहा। नगर निगम 22 महीने के लंबे इंतजार के बाद निजी कंपनी को डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए चुन पाया।
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कूड़ेदान
- फोटो : अमर उजाला
14 करोड़ के डस्टबिन बंटे, कचरा अलग न हुआ
स्वच्छ सर्वे में घर से कचरा अलग-अलग करने पर नंबर है, लेकिन गीला और सूखा कचरा मिक्स होकर मिला। हालांकि नगर निगम ने 14 करोड़ रुपये के डस्टबिन शहर के लोगों में बांट दिए, लेकिन घरों का कचरा अलग अलग होकर नहीं मिल पाया। घर से कचरा लेने की व्यवस्था फेल होने के कारण डस्टबिन बांटने का फायदा नहीं हो पाया। निगम ने इसी तरह गीले कचरे से खाद बनाने के लिए कंटेनर भी बांटे, पर वह भी असर नहीं डाल पाया।
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कूड़े के ढेर पर गोवंश
- फोटो : अमर उजाला
चार करोड़ के ट्रांसफर स्टेशन पड़े बंद
नगर निगम ने एक साल पहले ट्रांसफर स्टेशन बनवाए, ताकि घरों से निकलकर गाड़ियां कचरा ट्रांसफर स्टेशन तक पहुंचाएं। डलाबघर और डस्टबिन में कचरा डालने की जगह घरों से ट्रांसफर स्टेशन पर कचरा लाया जाए, पर पूरे साल यह व्यवस्था ठप रही। कोठी मीना बाजार मैदान, आईएसबीटी पर रेल लाइन से सटाकर कचरा डंप किया गया। चार करोड़ रुपये इन स्टेशनों के निर्माण पर खर्च हुए जिसका उपयोग नहीं हुआ।
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आगरा नगर निगम
26 नवंबर को नगर निगम कार्यकारिणी की सफाई पर बैठक
स्वच्छ सर्वेक्षण 2021 के परिणाम घोषित होने के बाद आगरा नगर निगम में इस बार मायूसी का आलम रहा। न बैंडबाजे बजे, न ढोल ताशे। पिछले साल नगर निगम और मेयर कैंप कार्यालय पर पार्षद, आम लोग और जनप्रतिनिधियों ने खुशी जाहिर की थी, लेकिन इस बार रैंकिंग में गिरावट देखते हुए मेयर नवीन जैन ने 26 नवंबर को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है, जिसमें नगर आयुक्त, अपर नगर आयुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, पर्यावरण अभियंता समेत अधिकारियों के साथ सफाई पर मंथन किया जाएगा।
अमर उजाला ने सफाई में लापरवाही पर लगातार चेताया
अमर उजाला ने कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद सफाई व्यवस्था में आई गिरावट पर लगातार चेताया। डोर टू डोर व्यवस्था ठप रहने के साथ ट्रांसफर स्टेशन बंद होने, कचरा डंपिंग साइट की जगह शहर में ही खपाने और डलाबघरों पर कचरा जलाकर निस्तारित करने के मामलों को लगातार हर माह प्रकाशित किया, लेकिन नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी अपना महकमा सुधार नहीं सके। केवल सफाई कर्मियों की नियुक्तियों पर ध्यान देने और सफाई व्यवस्था में लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई न करने का खामियाजा आगरा नगर निगम को उठाना पड़ा।
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आगरा के मेयर नवीन जैन
- फोटो : अमर उजाला
गिरावट को हमने चुनौती के रूप में लिया है- मेयर
मेयर नवीन जैन ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण में आगरा नगर निगम की रैंकिंग में गिरावट को हमने चुनौती के रूप में लिया है। निश्चित रूप से कई कमियां रही हैं, लेकिन उन कमियों को इन दो माह में दूर कर हम स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 की तैयारी में जुट जाएंगे। इस बार टॉप-10 का सपना पूरा करके रहेंगे।
सफाई व्यवस्था के आंकड़े
750 मीट्रिक टन कचरा शहर में हर दिन
100 वार्ड हैं आगरा नगर निगम में
92 बड़े वाहनों से कचरा लैंडफिल साइट पर
4500 सफाई कर्मचारी हैं निगम में
3715.53 हैं स्वच्छ सर्वेक्षण में आगरा के अंक
4391 अंक मिले थे बीते साल के सर्वेक्षण में
पांच साल में 263 से 16 तक पहुंचे...फिर गिरे
साल रैंकिंग
2021 24
2020 16
2019 85
2018 102
2017 263