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Agra: किसी के बेटों ने मुंह मोड़ा तो किसी के पौत्रों ने की मारपीट, अपनों से दूर आश्रम में कट रही जीवन की सांझ

Fri, 24 Jun 2022 11:31 AM IST
धीरेन्द्र सिंह रंजना शर्मा, आगरा
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वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग - फोटो : अमर उजाला
फिल्म बागवां तो देखी होगी। इसकी कहानी तो विशुद्ध कल्पना थी लेकिन ये एकदम सच है। एक पिता के लिए न बच्चों के घर में जगह बची है और शायद दिल में भी नहीं। जिस पिता ने बचपन में उनके लाख नखरे सहे हैं उनके पास अपने नाराज पिता को मनाने का वक्त भी नहीं है।  

अंगुलियां थामकर खुद चलना सिखाया था जिसे, राह में छोड़ गया राह पर लाया था जिसे...। 
दिवंगत कवि डॉ. कुंवर बेचैन की ये पंक्तियां उन पालनहारों के दर्द से उपजी हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को फूल की तरह सहेजा, संवारा और काबिल बनाया और फूलों ने बागवां को ही बगिया से बेदखल कर दिया। पीड़ा इस बात की अधिक है कि बच्चों ने फादर्स डे पर तो दिखावे के लिए उनको घर पर रखा, इसके बाद उनसे छत छीन ली। दामन खुशियों से खाली है। कुछ है तो बस आंखों में समंदर भर आंसू। अपने के व्यवहार से छलनी दिल...। जीवन की सांझ वृद्धाश्रम में काटने की मजबूरी है। 
 
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रामलाल वृद्धाश्रम आगरा - फोटो : अमर उजाला
फादर्स डे के बाद चार बुजुर्ग रामलाल वृद्धाश्रम पहुंचे। आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि एक बुजुर्ग को उनका बेटा आश्रम में छोड़ गया था जबकि अन्य लोगों से रास्ता पूछते-पूछते आ गए। तीन बुजुर्गों के बेटों ने मुंह मोड़ लिया था जबकि एक को उनके पौत्रों ने मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया था। 
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कन्हैयालाल - फोटो : अमर उजाला

फादर्स डे के दूसरे दिन पौत्रों ने घर से निकाला

शास्त्रीपुरम निवासी 90 वर्षीय कन्हैया लाल ने बताया कि बेटे की तीन साल पहले हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद से बहू और पौत्र उनसे अक्सर झगड़ने लगे थे। उनका घर में रहना दुश्वार कर दिया था। जायदाद के लिए पौत्र आए दिन मारपीट करते। 18 जून को भी मारपीट की और घर से बाहर निकाल दिया था। तब छोटे पौत्र ने कहा कि इन्हें रविवार तक और रखते हैं, फादर्स डे के बाद घर छोड़ने के लिए कह देंगे। सोमवार को पौत्रों ने रात में घर से बाहर निकाल दिया। जैसे-तैसे आश्रम पहुंचा। यह कहते हुए कन्हैया लाल अपने आंसू नहीं रोक पाए और फफककर रोने लगे।

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राधाकृष्ण वर्मा - फोटो : अमर उजाला

एक बेटे ने छोड़ा चौराहे पर, दूसरे ने आश्रम में

बेलनगंज निवासी 70 वर्षीय राधाकृष्ण वर्मा को उनका बेटा फादर्स डे की रात को आश्रम छोड़ गया था। भर्राई आवाज में बोले कि पत्नी की 45 साल पहले मौत हो गई थी। चार बच्चों की जिम्मेदारी मैंने अकेले संभाली। कभी उनको मां की कमी महसूस नहीं होने दी। जीवन के जिस पड़ाव पर मुझे उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी उन्होंने मुझसे दामन छुड़ा लिया। कुछ देर की चुप्पी और बहते हुए आंसुओं को पोंछने के बाद उन्होंने बताया कि बड़ा बेटा फादर्स डे की देर रात बेलनगंज चौराहा पर उनको छोड़ गया था। लोगों ने छोटे बेटे को फोन किया। लगा कि वह मुझे आकर ले जाएगा। छोटा बेटा आया लेकिन वो मुझे घर नहीं लेकर गया, आश्रम छोड़ गया।   
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विजेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला

बेटों ने कहा कि फादर्स डे तक रुक सकते हो

मथुरा निवासी 65 वर्षीय विजेंद्र सिंह सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त हैं। उनके पांच बेटे और तीन बेटियां हैं। वह सोमवार को आश्रम में पहुंचे। बातचीत शुरू करते ही वह रोने लगे। ढांढस बंधाने पर आंसू पोंछते हुए बोले, संतान ने उन्हें बहुत दुख दिए हैं। कभी सोचा नहीं था कि जीवन में ये दिन भी देखना पड़ेगा। आज सोचता हूं कि लालन पालन में मुझसे क्या कमी रह गई कि बेटों ने उनका साथ छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि वह रविवार को ही आश्रम में आने वाले थे। दो बेटों ने यह कहकर रोक दिया कि फादर्स डे तक वह उनके यहां रुक सकते हैं। सोमवार को चले जाएं। ऐसे में वहां कैसे रुकते, रविवार को ही घर छोड़ दिया। किसी ने आश्रम के बारे में बताया था। पैसे नहीं थे, बिना टिकट ही ट्रेन में चढ़कर आगरा आ गए। कैंट से चलकर सोमवार को आश्रम में पहुंच गए।
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