सावन माह में भोलेनाथ की असीम अनुकंपा अपने भक्तों पर रहती है। भक्त भी बाबा को प्रसन्न करने के लिए अनुष्ठान और अभिषेक कर रहे हैं। शिवालयों में अभिषेक कराने वालों की कतार तो है ही, शृंगार कराने वाले भी पीछे नहीं हैं। मंदिर के महंतों और आचार्यों की मानें तो शृंगार बाबा को सबसे अधिक प्रिय है, जो कार्य दिन भर वेद मंत्रों से नहीं होता। वो शृंगार से हो सकता है। भक्त चंदन, रोली, भस्म के साथ साथ फूलों से भी भोलेनाथ का शृंगार कर रहे हैं।
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आगरा के कैलाश मंदिर में स्थापित शिवलिंग
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे किया जाता है शृंगार
पंडित चन्द्रबल्लभ शर्मा के अनुसार भगवान शिव को चंदन ओर रोली का शृंगार सबसे अधिक प्रिय है। शृंगार के सामान को प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है। बाबा भोलेनाथ के शृंगार में 1100 रुपये तक खर्च आता है। बाकी भक्त की श्रद्धा पर निर्भर करता है कि वो कैसा शृंगार कराता है।
- चंदन, रोली शृंगार में चावल, काले तिल, जनेऊ, बेलपत्र, फूल माला, वस्त्र आदि शामिल होते हैं।
- पंच मेवा शृंगार में बादाम, काजू, छुवारा, मखाना, किशमिश शामिल होती है।
- भांग शृंगार में भोले नाथ के स्वरूप का शृंगार भांग से किया जाता है, जिसमे भांग, मेंहदी, धूप, नारियल की जटा शामिल होती है।
- भस्म शृंगार में बाबा की जब तक आरती होती है। तब तक सूती कपड़े से बाबा पर भस्म को अखंड चढ़ाई जाती है। ये कामधेनु गाय के गोबर, कपूर,
हवन की सामग्री, गूगल, अबीर, जतामशी, धूप, जौ आदि से बनाई जाती है।
- फलों का शृंगार - इसमें पांच प्रकार के फल शामिल होते हैं।
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कैलाश मंदिर में चंदन से शिवलिंग का शृंगार
- फोटो : अमर उजाला
यह होता है लाभ
1. चंदन रोली का शृंगार - आपदा एवं भय दूर होता है।
2. भस्म का शृंगार - 60 हजार हाथियों का बल प्राप्त होता है।
3. बेलपत्र का शृंगार - तीन जन्म के पाप नष्ट होते हैं।
4. भांग का शृंगार - शत्रु पर विजय प्राप्त होती है।
5. पंच मेवा का शृंगार - मनौती पूरी होती है।
6. मेहंदी का शृंगार - पत्नी की प्राप्ति होती है।
7. फलों का शृंगार - संतान प्राप्ति होती है।
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आगरा शहर के मध्य स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर
कैलाश मंदिर के महंत चन्द्रकांत गिरी के अनुसार हर रोज बाबा का शृंगार अलग-अलग रूप में किया जा रहा है। कई कई शिव भक्त शृंगार कराने के लिए मंदिर पर पहुंच रहे हैं। जब कुछ शिव भक्त एक जैसा शृंगार कराने की इच्छा जताते हैं तो उनका एक साथ कर दिया जाता है। कई बार दूसरे दिन के लिए कह दिया जाता है।
राजेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालु गौरव कहते हैं कि भोले बाबा बहुत की भोले हैं। वो शृंगार और अभिषेक से ही प्रसन्न हो जाते हैं। बाबा का अभिषेक तथा शृंगार करने से मन को भी शांति मिलती है। जब मौका मिलता है। तभी बाबा का शृंगार कर पुण्य लाभ कमाता हूं। इसी तरह विशाल भारती भी हर सावन में महादेव का शृंगार करते हैं।