लोकसभा चुनावों में सपा के दुर्ग को ध्वस्त करने के लिए हर बार जोर आजमाइश हुई। कभी बसपा तो कभी भाजपा ने टक्कर दी, लेकिन जीत सपा की हुई। मैनपुरी सीट पर इस बार भी सपा और भाजपा आमने सामने हैं। दोनों ही दल जीत के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं।
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नामांकन के लिए कलक्ट्रेट जाते मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 1996 के चुनाव से मैनपुरी में मुलायम सिंह यादव ने ताल ठोंकी। तब से अब तक हर बार सियासी दंगल में मुलायम अपने विरोधियों को चित करते आए हैं। खास बात ये रही कि इस गढ़ की दीवारें ध्वस्त करने के लिए भाजपा और बसपा ने पूरजोर कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुईं।
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प्रेम सिंह शाक्य और मुलायम सिंह यादव (फाइल)
मुलायम सिंह यादव की तीन पीढ़ियां मैनपुरी संसदीय क्षेत्र के रास्ते संसद की दहलीज पर पहुंचीं। अब पांचवी बार फिर मुलायम सिंह यादव सियासी दंगल में उतरे हैं। इस बार मुकाबला सपा और भाजपा के बीच माना जा रहा है।
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मुलायम सिंह के साथ अखिलेश यादव (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
1996 में जब मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी से चुनाव लड़ा तो वो अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी उपदेश सिंह चौहान से 51 हजार 958 वोट से जीते थे। वहीं 2014 में जब चुनाव हुआ तो मुलायम सिंह यादव भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न सिंह चौहान से तीन लाख 64 हजार 66 वोट से जीते। इन दोनों ही आंकड़ों में लगभग सात गुने का अंतर है।