आगरा में जब ऑक्सीजन का संकट था, तब पांच दिन 24 से 28 अप्रैल तक दिन-रात अफसर ऑक्सीजन इंतजाम के लिए दौड़ते रहे। उनकी नींद तक उड़ गई थी। एसएन मेडिकल कॉलेज में भी ऑक्सीजन की कमी हो गई। आनन-फानन में एक टैंकर मंगाकर 200 से अधिक मरीजों की सांसों की डोर थामी। परंतु निजी कोविड अस्पतालों 25 अप्रैल की रात कभी न भूलने वाली रात बन गई।
ताजनगरी में पांच दिनों तक ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा रहा। तब एक ऑक्सीजन सिलिंडर प्लांट था, जिस पर 46 कोविड अस्पताल निर्भर थे। किसी को पांच, तो किसी को दस सिलिंडर मिल सके। शहर में 3500 से अधिक सक्रिय मरीज थे, जिनके लिए सांसों का संकट था। नोएडा व अन्य जिलों से मिलने वाले ऑक्सीजन टैंकर पर सब निर्भर था। शहर में 50 टन ऑक्सीजन की मांग के सापेक्ष तब 15 से 20 टन रोजाना मिल सकी थी।
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एसएन मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन का टैंकर (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
24 अप्रैल की रात एसएन मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो घंटे का ऑक्सीजन बैकअप बचा था। एसएन प्रबंधन ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई तो अधिकारी रात में दौड़े। एक टैंकर बमुश्किल इंतजाम हो सका था। इससे एक दिन पहले 23 अप्रैल को राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों ने सर्किट हाउस में बैठक कर ऑक्सीजन आपूर्ति पर चर्चा भी की थी, परंतु ऑक्सीजन आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। 25 अप्रैल को कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति की जांच के लिए पांच अस्पतालों का दौरा किया।
संकट में की गई ये कवायद
- औद्योगिक इकाइयों के लिए ऑक्सीजन गैस की आपूर्ति पर रोक लगाई।
- कोविड अस्पतालों ने ऑक्सीजन खत्म होने के नोटिस चस्पा किए।
- ऑक्सीजन खपत की जांच के लिए अस्पतालों का ऑडिट करना पड़ा।
- ऑक्सीजन आपूर्ति करने वाले वेंडर्स के गोदामों की जांच करनी पड़ी।
- सीएमओ, आईएमए के साथ ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर बैठकें हुईं।
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कोविड कंट्रोल रूम
- फोटो : अमर उजाला
कंट्रोल रूम पर पांच दिन में आई थी 3247 कॉल
नगर निगम स्थित कोविड कमांड कंट्रोल रूम 21 अप्रैल को शुरू हुआ। 24 से 28 अप्रैल तक यहां पांच दिन में 3247 लोगों ने कॉल कर मदद मांगी। जिनमें 645 लोगों ने तीन से चार बार कॉल की। सबसे ज्यादा 1363 कॉल ऑक्सीजन के लिए आईं। 677 लोगों ने हॉस्पिटल में बेड दिलाने की गुहार लगाई, जबकि 562 लोग ऐसे थे जिन्होंने रेमेडिसिविर इंजेक्शन के लिए कंट्रोल रूम पर फोन किया। उन दिनों कंट्रोल रूम की हॉट लाइनें हैंग हो गई। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर ऑक्सीजन की कमी नहीं थी तो फिर इतने लोगों ने कॉल क्यों किए।
कंट्रोल रूम की रिपोर्ट
24 अप्रैल- कुल 687 कॉल जिनमें 119 इंजेक्शन के लिए, 139 बेड और 130 ऑक्सीजन के लिए, बाकी मिसिंग।
25 अप्रैल- कुल 739 कॉल जिनमें 115 इंजेक्शन के लिए, 133 बेड और 376 ऑक्सीजन के लिए, बाकी मिसिंग।
26 अप्रैल- कुल 680 कॉल जिनमें 119 इंजेक्शन के लिए, 99 बेड और 352 ऑक्सीजन के लिए, बाकी मिसिंग।
27 अप्रैल- कुल 662 कॉल जिनमें 86 इंजेक्शन के लिए, 175 बेड और 284 ऑक्सीजन के लिए, बाकी मिसिंग।
28 अप्रैल- कुल 479 कॉल जिनमें 104 इंजेक्शन के लिए, 78 बेड और 221 ऑक्सीजन के लिए, बाकी मिसिंग।