उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह के नाम पर विश्वविद्यालय बनाने जा रही है। इसका शिलान्यास करने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र 14 सितंबर आ रहे हैं। लेकिन अलीगढ़ के पड़ोसी जिले मथुरा के वृंदावन में स्थित राजा महेंद्र प्रताप सिंह की समाधि अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने वृंदावन में अपनी जमीन पर प्रेम महाविद्यालय नाम से इंटर कॉलेज बनवाया था। यह महाविद्यालय स्वतंत्रता संग्राम का साक्षी रहा है। इसके सामने यमुना किनारे स्थित उनकी समाधि है, जो अब बदहाल स्थिति में है। यहां के लोगों ने उनके समाधि स्थल को विश्व घाट के रूप में विकसित करने की मांग उठाई है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- फोटो : ANI
प्रेम महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. देव प्रकाश शर्मा ने वृंदावन स्थित राजा महेंद्र प्रताप की समाधि की दुर्दशा पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप के नाम से बनने जा रहे राजकीय विश्वविद्यालय का शिलान्यास करने के लिए आ रहे हैं। लेकिन वृंदावन स्थित राजा साहब की समाधि स्थल की ओर किसी का ध्यान नहीं है। उन्होंने राजा साहब को भारत रत्न की मांग भी उठाई है।
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प्रेम महाविद्यालय में बच्चे (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा के आर्य कन्या इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की अध्यक्ष यमुना चौधरी एडवोकेट ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री सहित केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि यमुना किनारे स्थित राजा साहब की समाधि को विश्व घाट के रूप में विकसित करें। शहर के सोनू पंडित, शिव अधार सिंह यादव, अरुण कुमार सिंह, अजय कुमार मौर्य, प्रमोद कुमार, राम प्रसाद, डॉ. सोमकांत त्रिपाठी ने भी यह मांग की है।
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राजा महेंद्र प्रताप सिंह
राजा महेंद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, पत्रकार, लेखक, क्रांतिकारी, समाज सुधारक और महान दानवीर थे। उन्होंने 1909 में वृंदावन में प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की, जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केंद्र था। मदनमोहन मालवीय इसके उद्धाटन समारोह में उपस्थित रहे। राजा महेंद्र प्रताप सिंह का वृंदावन में ही 80 एकड़ में उद्यान था, 1911 में आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश को दान में दे दिया। जिसमें आर्य समाज गुरुकुल है और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी है।
प्रेम महाविद्यालय जंग-ए-आजादी का गोपनीय ठिकाना बना था। इस महाविद्यालय में कई प्रमुख नेताओं ने छिपकर अंग्रेजों से लड़ने के लिए रणनीति बनाई थी। महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद आदि आजादी के दीवाने इस महाविद्यालय में आए और ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ बड़ी-बड़ी योजनाओं के सूत्रधार रहे थे।