प्रदूषण के आंकड़े
- फोटो : अमर उजाला
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि अधिकारी सुप्रीम कोर्ट, एनजीटी तक को गुमराह कर रहे हैं, जबकि यमुना की हालत और खराब हो रही है। वह भी इस समय, जब कोरोना कर्फ्यू के कारण उद्योग बंद हैं, जिनका वेस्ट नहीं जा रहा। एसटीपी चल नहीं रहे, केवल भुगतान लिया जा रहा है। यह सब शोपीस बने हुए हैं।
सीवेज पहुंच रहा यमुना में
पर्यावरणविद चंद्रशेखर ने कहा कि नालों का पानी नहीं, बल्कि सीवेज यमुना में पहुंच रहा है। वीए टेक वबाग को 48 करोड़ दिए जा रहे हैं तो यमुना में प्रदूषण कम क्यों नहीं हुआ, जबकि लॉकडाउन के कारण फैक्टरियां बंद हैं। केवल कागजों में काम हो रहा है।