कब्जों पर लटके दरवाजे और खिड़कियां। छतों से टपकता पानी। गिरासू छज्जे। रंगाई-पुताई न मरम्मत। हर वक्त हथेली पर जान। ये हाल है आगरा के नॉर्मल कपाउंड स्थित सरकारी आवासों का। जहां हर वक्त हादसों का खतरा मंडराता रहता है। आवासों की मरम्मत की गुहार लगा-लगा कर कर्मचारी थक गए, लेकिन बदहाली दूर नहीं हो सकी।
जिले में पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य, न्यायिक व अन्य विभागीय कर्मचारियों के लिए 750 से अधिक आवास हैं। जिनमें 330 आवास ऐसे हैं जो जर्जर हो चुके हैं। इनमें कर्मचारियों के परिवार जान हथेली पर रख कर रहते हैं। इन आवासों के पुनर्निर्माण के लिए करीब 70 करोड़ रुपये की दरकार है। पिछले 20 साल से जर्जर आवासों के पुनर्निर्माण के लिए फंड नहीं मिला।
पंचकुइयां जूता मंडी के बराबर से बने नॉर्मल कपाउंड में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां 50 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां रहने वाले एसएन कर्मचारी गोपाल वर्मा ने बताया कि एक साल में पांच बार प्रशासन को पत्र लिख कर मरम्मत के लिए गुहार लगाई। पीडब्ल्यूडी टीम ने सर्वे किया, लेकिन मरम्मत अब तक नहीं हो सकी।