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सरकार, ताजनगरी को कब मिलेगा इंसाफ: श्री पारस अस्पताल प्रकरण के पीड़ितों की मुख्यमंत्री से गुहार

Sun, 08 Aug 2021 08:51 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
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पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से लगाई इंसाफ की गुहार - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री जी, ताजनगरी को इंसाफ कब मिलेगा। कोरोना की दूसरी लहर में जब ऑक्सीजन के संकट से शहर जूझ रहा था, तब श्री पारस अस्पताल ने मरीजों की ऑक्सीजन रोकने की मॉकड्रिल की। दो महीने बाद भी आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित सरकार से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। 

श्री पारस मामले में सीबीआई जांच की मांग
श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल के बाद प्रशासन ने अस्पताल संचालक डॉ. अरिंजय जैन को अघोषित क्लीन चिट दे दी। जिन्होंने ऑक्सीजन की कमी से अपनों को खोया, ऐसे लोगों को प्रशासनिक जांच पर कतई भरोसा नहीं। पीड़ित परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इंसाफ की आस लेकर सीबीआई जांच कराने की मांग कर रहे हैं। पीड़ितों ने कहा कि श्री पारस अस्पताल मामले में मुख्यमंत्री सीबीआई से जांच कराएं। 26 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल में कथित 22 मरीजों का दम घुटने लगा था।
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पीड़ित प्रियंका सिंह और नत्थीलाल त्यागी - फोटो : अमर उजाला
'साजिश कर मेरी मां की हत्या'
दहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि मेरी मां की मौत नहीं हुई, साजिश कर उनकी हत्या की गई। श्री पारस अस्पताल में उस दिन कैमरे बंद कर दिए। मेरी मां की ऑक्सीजन छीनी गई। दम घुटने से उनकी मौत हुई। आखिर हमें न्याय कब मिलेगा। जो जिम्मेदार है उनके खिलाफ कार्रवाई कब होगी।

'मौतों पर हुई होगी सौदेबाजी'
मधु नगर के नत्थीलाल त्यागी ने कहा कि मेरी पत्नी और जवान बेटे की मौत हो गई। श्री पारस अस्पताल में मेरी पत्नी को ऑक्सीजन मिल जाती तो वो आज जिंदा होती। मौतों के नाम पर अफसरों ने सौदेबाजी की होगी। मुझे शासन, प्रशासन की जांच पर भरोसा नहीं है। सीएम इसकी सीबीआई जांच कराएं।
 
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी दुरबीन सिंह ने कहा कि एक दिन पहले ही बेटे को भर्ती कराया था। ऑक्सीजन नहीं थी तो भर्ती करने से मना कर देते। उसे भर्ती किया तो ऑक्सीजन क्यों नहीं दी। मेरा बेटा अकेला कमाने वाला था। पूरे घर का सहारा था। क्या कसूर था जो जान ले ली। मैंने कलक्ट्रेट के चक्कर लगाए, लेकिन न्याय नहीं मिला।

'योगीराज में क्यों हो रहा अंधेर'
इटावा के राजू सिंह ने कहा कि योगीराज में हमारे साथ ये अंधेर क्यों हो रहा है। अस्पताल संचालक को क्यों बचाया जा रहा है। ऑक्सीजन नहीं थी तभी तो मॉकड्रिल की गई। मेरी बहन विधवा हो गई। उसका एक साल का बेटा है। उसे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहा हूं। सरकार को हमारी तकलीफ समझनी चाहिए।

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उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा। - फोटो : ANI
प्रशासन ने खड़े किए हाथ, पुलिस भी लापरवाह
श्री पारस अस्पताल कांड में दो जुलाई को उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने जिलाधिकारी की जांच को सतही बताया था। आगे विस्तृत जांच होने की बात कही थी, लेकिन जिला प्रशासन ने आगे किसी तरह की जांच करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
दूसरी तरफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी तो दूर संचालक से पूछताछ तक नहीं की गई। स्वास्थ्य विभाग ने लाइसेंस निरस्त नहीं किया। अवैध तरीके से बनी इमारत पर एडीए कार्रवाई की जगह चुप्पी साध गया। नगर निगम, प्रदूषण बोर्ड, अग्निशमन आदि विभागों की कार्यशैली भी कठघरे में है।
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