आईएमए जांच समिति को बयान दर्ज कराने वाले मरीजों के परिजनों ने अमर उजाला को भी अपना दर्द बताया। मालवीय कुंज रहने वाली गीता ग्रोवर ने बताया कि 26 अप्रैल की सुबह 11 बजे से अफरातफरी शुरू हो गई थी। सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए थे। शाम चार बजे से देर रात तक एक-एक करके शव लेकर परिजन जा रहे थे। सीसीटीवी कैमरे भी बंद कर दिए थे। कुछ तो गड़बड़ जरूर रही, मॉकड्रिल भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि मेरी ननद मीरा ग्रोवर को सांस लेने में परेशानी पर 21 अप्रैल को सुबह 11 बजे श्री पारस अस्पताल में भर्ती कराया। 22 की सुबह सात बजे फोन आया सिर में दर्द है, इलाज ठीक नहीं मिल रहा, मुझे घर ले जाओ। रात को ही आरटीपीसीआर की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर कोविड वार्ड में शिफ्ट कर दिया। 23 की सुबह सीसीटीवी कैमरे से मरीज को दिखाया। फोन पर पूछने पर उन्होंने बताया कि पूरे दिन दवाएं नहीं दी, इससे उनका पेट फूल गया।