आगरा में 77 साल बाद ताजमहल के मुख्य मकबरे के गुंबद को सहेजा गया है। कोरोना काल के दौरान मकबरे पर गुंबद के टूटे पत्थरों को लगाया गया और प्वाइंटिंग कराई गई। जमीन से करीब 239 फीट ऊंचाई पर ताज के गुंबद पर झूला लटका कर एएसआई कर्मचारियों ने गुंबद का संरक्षण कार्य किया। 1944 के बाद पहली बार ताज के गुंबद पर इनले पीस लगाने और चारों बुर्जियों का संरक्षण किया गया है।
लॉकडाउन में जब ताजमहल पर्यटकों के लिए बंद रहा, तब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने मकबरे के मुख्य गुंबद और इसकी चारों बुर्जियों का संरक्षण किया। मकबरे के संगमरमरी गुंबद पर पच्चीकारी के पत्थर निकल गए थे। सफेद संगमरमर के गुंबद पर नीचे काले रंग का बार्डर बना हुआ है, जिसके इनले पीस संरक्षण केदौरान लगाए गए।