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नाग पंचमी 2021: हस्त-नक्षत्र व साध्य योग में कल्कि जयंती के साथ मनेगा पर्व, पूजा के लिए ये है शुभ समय

Wed, 11 Aug 2021 06:48 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
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नाग पंचमी 2020 - फोटो : Rohit Jha
सावन का पूरा महीना विशेष योग संयोग में मनाया जा रहा है। रविवार फल द्वितीया से प्रारंभ सावन रविवार को रक्षा बंधन के साथ पूरा होगा। आचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि श्रावण शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पंचमी तिथि के स्वामी स्वयं नाग देवता ही है। पूरे देश में नाग पूजा मनाई जाती है। 13 अगस्त शुक्रवार को नागपंचमी का पर्व हस्त-नक्षत्र व साध्य योग में कल्कि जयंती के साथ मनाया जाएगा। शुक्रवार को पंचमी तिथि दोपहर 1.42 बजे तक रहेगी। हस्त-नक्षत्र शाम 7.58 बजे तक और साध्य योग शाम 6.48 बजे तक रहेगा। नागपूजा प्रातः काल में ही की जाती है। आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि नागों का मूल पाताल लोक माना जाता है। भोगवतीपुरम इसकी राजधानी के नाम से प्रसिद्ध है। धर्मशास्त्रीय ग्रंथों में नागों का उदगम महर्षि कश्यप व उनकी पत्नी कद्रू से माना जाता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि नागों को आनंद प्रदान करने वाली है।
 
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नाग पंचमी 2020
नाग पंचमी के दिन नाग-नागिन के जोड़े को गोदुग्ध से स्नान कराने का विधान है। स्नान कराने के बाद नवीन वस्त्र व विविध पूजा सामग्री से महिलाएं व परिजन श्रद्धा पूर्वक नाग-नागिन के जोड़े की पूजा करते हैं। मालवा में अनेक घरों में आज के दिन चूल्हे पर तवा नही चढ़ाया जाता है। घरों में दाल, बाटी व चूरमा भोग के रूप में बनाया जाता है। धूप ध्यान के साथ दाल बाटी का भोग भी नाग देवता को लगता है।
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नाग पंचमी पर नाग की पूजा करतीं श्रद्धालु (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
गाय का दूध ही पूजा में क्यों प्रयोग किया जाता हैं
गाय के दूध से स्नान कराने से नागों को दाहपीड़ा से छुटकारा मिलता है और शीतलता प्राप्त होती है। मान्यता है कि गाय का दूध सर्प भय से मुक्ति भी प्रदान करता है। इस विषय में पुराणों में अनेक कथाएं और आख्यान भी मिलती है जो इन तथ्यों की पुष्टि करती है। 
 

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आचार्य शर्मा वैदिक - फोटो : अमर उजाला
आचार्य शर्मा वैदिक ने बताया कि नागपंचमी को नागों का धार्मिक विधि से चित्रांकन किया जाता है। स्वर्ण, रजत, लकड़ी अथवा पवित्र मिट्टी के नाग बनाकर उनकी पूजा की जाती है। आचार्य शर्मा ने बताया कि भारतीय संस्कृति में नाग को देवता के रूप में स्वीकार किया गया है। श्री गणेश जी व शिव के गले की शोभा ही नाग देवता हैं। विष्णु भगवान का संबंध शेष शय्या से है। पुराणों में सूर्य के रथ में 12 नागों का उल्लेख प्राप्त होता है। ये सभी नाग की देवता के रूप में ही पुष्टि करते है।
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शिव भगवान की मूर्ति के आगे बैठे नाग देवता फाइल - फोटो : अमर उजाला
कालसर्प दोष, पितृदोष, मातृ दोष, विषयोग, ग्रहण दोष में नाग पूजा से मिलता है लाभ
जिन लोगों की जन्म कुंडली मे सर्प दोष, जन्य आदि ग्रह बाधा हों उनसे मुक्ति के लिए विधि विधान से तीर्थ स्थलों नासिक, उज्जैन आदि स्थलों में पवित्र नदी के किनारे नारायण बलि, नाग बलि, सर्प पूजन व सर्प विसर्जन आदि धर्मिक विधियां भी नागपंचमी को विशेष रूप से ब्राह्मणों द्वारा कराई जाती हैं। इस प्रकार नाग पंचमी के पर्व की धार्मिक महत्ता के साथ पर्यावरण व वनसंपदा में भी महती भूमिका मानी जाती है। 
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