जरी का काम करते मुस्लिम कारीगर
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मुकुट में पगड़ी, नगीने, कांच, मोती, माला, चूड़ी, वंशी, बुंदे, हार, मोरपंख समेत अन्य सामान से सजाया जा रहा है। इसमें किसी भी तरह की मशीन की मदद नहीं ली जा रही है, रेशम के धागे से छोटी-छोटी सुइयों से जरी का काम किया जा रहा है। मुकुट इतना सुंदर होगा कि जब कान्हा के सिर पर सजेगा और रात में रोशनी पड़ेगी तो नजर नहीं टिकेगी।