छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में 22 वीर सपूतों के बलिदान पर 11 साल पहले नक्सली हमले में ही अपना बेटा खोने वाले नौगवां के पीतम सिंह नरवरिया और शांती देवी का दर्द छलक पड़ा। वे शहीद बेटे निर्वेश की उपेक्षा से आहत हैं। बताया कि सरकार ने घर तक के लिए 60 गज खड़ंजा तक नहीं बनवाया। शहीद स्मारक का खर्च तक नहीं मिला।
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शहीद निर्वेश के माता-पिता
- फोटो : अमर उजाला
विगत 6 अप्रैल 2010 में छत्तीसगढ के दंतेवाडा में ऑपरेशन ग्रीन हंट के दौरान नौगवां (बाह) का लाल निर्वेश नौ नक्सलियों को ढेर कर शहीद हुआ था। शहादत के बाद आज निर्वेश की मां शांती देवी और पिता प्रीतम सिंह नरवरिया उपेक्षा से आहत दिखे।
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छत्तीसगढ़ृ में शहीद हुए निर्वेश का शहीद स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय की डायरी में शहीद स्मारक बनाए जाने का उल्लेख होने के बाद भी सरकार ने बेटे की यादों को नहीं सहेजा। इसके बाद उन्होंने अपने खर्च पर शहीद स्मारक बनवाया। इस पर हुए व्यय का आंकलन सरकार ने लोक निर्माण विभाग से कराया। अभियंता ने 3.12 लाख रुपये व्यय का आंकलन किया था। तब से अब तक 11 वर्ष बीत गए। शहीद स्मारक के निर्माण पर खर्च हुई धनराशि नहीं मिल सकी है।
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शहीद निर्वेश की मां और निर्वेश का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
सरकार शहीद के घर तक पहुंचने के लिए 60 गज की पगडंडी पर खड़जा तक नहीं बनवा सकी है। माता पिता ने बताया कि सरकार ने बेटे की शहादत के साथ भी छल किया है। पिता ने बताया कि शहीद स्मारक पर हुए 3 लाख 12 हजार रुपये के व्यय का आकलन सरकार द्वारा लोक निर्माण विभाग से कराया। जिसमें ढाई लाख रुपये भुगतान किए जाने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, अंबिकापुर छत्तीसगढ़ के कमांडेंट ने जिलाधिकारी को पत्र लिखा लेकिन भुगतान नहीं हो सका।
शहीद के पिता और निर्वेश का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
हराना है कोरोना, शहादत पर मत आना
मंगलवार को नौगवां के लाल निर्वेश की शहादत का दिवस मनाया। शहीद के पिता पीतम सिंह नरवरिया, मां शांती देवी ने भावुक अपील की थी कि बेटे की शहादत पर श्रद्धांजलि के लिए शहीद स्मारक पर न पहुंचें। कोरोना की जंग जीतनी है। वह खुद ही परिवार के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे। हर साल होने वाली श्रद्धांजलि सभा इस बार नहीं हुई।