संगमरमर पर पच्चीकारी करने वाले हुनरमंद हाथ दो महीने से काम के इंतजार में हैं। कोरोना के कारण पहले 188 दिन तक ताज बंद रहा तो काम खत्म हो गया। सितंबर में ताज खुला तो कुछ आर्डर आने शुरू हुए लेकिन अब फिर से होली से ही काम ठप है। हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रजत अस्थाना के अनुसार करीब 50 हजार लोग संकट में हैं। किसी का बैंक बचत खाता पूरी तरह से खाली हो गया तो कोई कर्ज लेकर जरूरी काम निपटा रहा है। ताजगंज और गोकुलपुरा की गलियों में संगमरमर को तराशने वाले कारीगरों की संख्या अधिक है। कोरोना की पर्यटन पर मार पड़ी तो खरीदार कम हो गए। काम मिलना कम हुआ तो पेशा बदलना पड़ा। अब कोई पानी के प्लांट में काम कर रहा है तो कोई मजदूरी कर रहा है। बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हैं। गोकुलपुरा, पंचकुइयां, शंभू नगर, ताजगंज, मलको गली में अब सन्नाटा पसरा है, जबकि पहले यहां कारीगर काम करते नजर आते थे।