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तस्वीरें: हर चुनाव में वादों से छले गए यहां के लोग, गांव में घरों के नाम पर सिर्फ झोपड़ियां हैं

Sun, 07 Apr 2019 03:23 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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गुडियाना गांव में बनी झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के यमुना किनारे के टीले पर झोपड़ियों का एक गांव गुडियाना। बीहड़ में बसे इस गांव में पेयजल, रास्ते तक इंतजाम नहीं है। धूलभरे कच्चे रास्ते से आने जाने वाले ग्रामीण यमुना का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। गांव वाले बताते हैं कि हर चुनाव में उन्हें नेता विकास के सपने दिखाते हैं। पर, अब तक एक भी वादा पूरा नहीं हो सका है। तस्वीरों में देखिए गांव की बदहाली...
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गुडियाना गांव का कच्चा रास्ता - फोटो : अमर उजाला
जैतपुर ब्लाक में यमुना नदी से 150 गज की दूरी पर टीले पर बसे गुडियाना गांव पहुंचने के लिए बीहड़ करीब पांच किलोमीटर धूलभरे कच्चे रास्ते से होकर जाना पड़ता है। करीब 400 की आबादी वाले गांव के लोगों के पास आवास के नाम पर झोपड़ी ही है। 
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मिट्टी के चूल्हे पर बनता है खाना - फोटो : अमर उजाला
शौचालय, रसोई गैस सिलिंडर तो दूर गांव में सस्तेदर के राशन की दुकान तक नहीं है। लोग राशन लेने के लिए पांच किलोमीटर जाते हैं। गांव की मनको देवी, कमलेश, विमलेश, सीता, कलियान देवी, आशा, चंद्रकांती, सुंदर देवी, राज कुमारी, मंगो देवी, सत्तो जैसी कई महिला परिवार हैं, जिनके पास राशन कार्ड ही नहीं है। 

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यमुना से पानी लेकर जातीं गुडियाना की महिलाएं व बच्चे - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग रामवती, सियादुलारी, रूसो, श्रीदयाल, रामकली, सत्तो देवी, रामलक्षन, जय नारायन को पेंशन नसीब नहीं है। गांव के लोग यमुना का गंदा और प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। शनिवार की दोपहर गांव की महिलाएं बच्चों को यमुना पर नहलाने के लिए ले गई थीं। वहीं से पीने के लिए पानी भी भरकर ले आईं।
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यमुना से पानी लेकर जातीं गुडियाना की महिलाएं व बच्चे - फोटो : अमर उजाला
एक साल के बेटे को गोद में लिए यमुना से पानी भर कर घर जा रही आशा ने बताया कि उसका मायका अटेर में है। वहां कस्बा है। शादी के बाद यहां आई तो महीनों रोती रही। मायके वालों को भी खरी खरी सुनाई। आशा बोली मेरे करम फूट गए। यहां पर न कोई सुविधा और न कोई साधन।  
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गुडियाना गांव के ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने बताया कि पानी को कोई इंतजाम नहीं है। इसी को छानकर पीती हैं। कोई बीमार हो जाए या प्रसव के लिए महिला को बाइक अथवा ऊंट से ले जाना पड़ता है। गांव के जय नारायन, मलखान, छोटेलाल, चंद्रभान, राम लक्षिन, रमेश चंद्र, रामवती आदि ने बताया कि हर चुनाव में गांव के विकास के सपने दिखाए जाते हैं। उसके बाद कोई पूछने तक नहीं आता। गांव के लिए सड़क तक तो नही बनी है। 
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गुडियाना गांव में बनी झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला
गांव में प्राइमरी स्कूल है। इससे बेटियां पांचवीं तक पढ़ लेती हैं। इसके बाद उनकी पढ़ाई छूट जाती है। यहीं नहीं बेटियों की शादी के लिए ग्रामीणों को गांव छोड़कर पड़ता है। तब कहीं जाकर हाथ पीले होते हैं। बच्चे चाहकर भी ज्यादा पढ़ नहीं पाते हैं।                                                                                                   
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गुडियाना गांव में बनी झोपड़ी - फोटो : अमर उजाला
गुडियाना में जंगली जानवर लकडबग्घे के हमले का डर रहता है। झोपड़ियों तक में लकडबग्घा घुस आता है। जंगली जानवर के हमले में चंद्रभान की चार बकरियां, रमेश की तीन बकरियां , संतराम की दो बकरियां मर चुकी हैं। खेत की रखवाली के वक्त मलखान पर हमला कर दिया था, जो अभी भी ठीक से नहीं चल पाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खेत से लेकर झोपड़ी तक जंगली जानवर के हमले की दहशत रहती है।   
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