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इतनी बड़ी जीत तो नरेंद्र मोदी को भी नहीं मिली, भाजपा के इस प्रत्याशी ने रचा इतिहास

Sat, 25 May 2019 11:46 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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नरेंद्र मोदी-अमित शाह - फोटो : PTI
फतेहपुर सीकरी लोकसभा सीट से विजयी भाजपा प्रत्याशी राजकुमार चाहर ने इतिहास रच दिया। उन्हें 4,95,065 वोटों से जीत मिली है। चाहर को कुल 6,67,147 वोट मिले। ब्रज के आगरा क्षेत्र में इतने वोट न तो कभी किसी को मिले, न ही इतने अंतर से कोई जीता। इतना ही नहीं, चाहर की यह जीत नरेंद्र मोदी की जीत से भी बड़ी है।  
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भाजपा के विजयी प्रत्याशी राजकुमार चाहर, कांग्रेस के राजबब्बर हारे - फोटो : अमर उजाला
नरेंद्र मोदी ने वाराणसी सीट से अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 479505 वोटों से जीत दर्ज की। उन्हें इस बार 674664 वोट मिले। ये दोनों आंकड़े राजकुमार से कम हैं। राजकुमार को मिले वोटों को अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि सीकरी में गठबंधन के प्रत्याशी गुड्डू शर्मा की तो जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर को और तीन हजार वोट कम मिलते तो उनकी भी जमानत जब्त हो जाती।

राजकुमार चाहर  - भाजपा - 6,67,147
राज बब्बर      - कांग्रेस  - 1,72,082
श्रीभगवान शर्मा  - बसपा  - 1,67,663 ( जमानत जब्त)
जीत का अंतर - 4,95,065
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कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर - फोटो : अमर उजाला
राज बब्बर ने कभी सपने में नहीं सोचा होगा कि एक दिन उस राजकुमार से हार जाएंगे जिसने कभी उन्हें ही चुनाव लड़ाया था। सीकरी में कुल 15 उम्मीदवार थे, 13 अपनी जमानत नहीं बचा पाए। 10 प्रत्याशियों को नोटा से भी बहुत कम वोट मिले हैं।

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जीत के बाद भाजपा नेता से गले मिलते राजकुमार चाहर - फोटो : अमर उजाला
लोकसभा चुनाव में कीर्तिमान रचने वाले राजकुमार चाहर तीन बार फतेहपुर सीकरी विधानसभा सीट पर हार चुके हैं। इस बार सांसद चौधरी बाबूलाल का टिकट कटने के बाद उन्हें टिकट मिला था और वो इस सीट पर सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में कामयाब रहे। 
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जीत का प्रमाणपत्र लेते राजकुमार चाहर - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2002 में राजकुमार चाहर ने राजनीतिक करियर शुरू किया और सीकरी के किसानों की आवाज उठाई। बसपा से वो पहली बार लड़े, पर 30,970 वोट पा सके। 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा का दामन थाम चुनाव लड़ा, पर महज 1400 वोटों से हार गए। 
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राजकुमार चाहर का परिवार - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2012 में चाहर भाजपा से बागी हुए और निर्दलीय ही चुनाव लड़े पर साढ़े पांच हजार वोटों से हार गए। इसके बाद वो कांग्रेस सांसद राज बब्बर के साथ रहे, लेकिन 2014 में फिर भाजपा में आ गए। चाहर रालोद के जिलाध्यक्ष भी रहे चुके हैं। 
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जीत के बाद खुशी जाहिर करते राजकुमार चाहर - फोटो : अमर उजाला
जीतने के बाद राजकुमार चाहर ने कहा कि मेरी जीत का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा कार्यकर्ताओं की मेहनत और पार्टी नेतृत्व को जाता है। अब मेरी प्राथमिकताएं युवाओं के लिए रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास करना है।
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