ताजनगरी की 70 साल की बुजुर्ग सहेलियां इंद्रावती और मंजू जीवन की नई पटकथा लिख रही हैं। उन्हें पढ़ाई की लगन लग गई है। शिक्षा उनके जीवन में नई रोशनी बिखेर रहा है। इंद्रावती ने हस्ताक्षर करना सीख लिया है। मंजू को रुपयों का हिसाब लगाने में मजा आ रहा है।
दोनों सहेलियों को अपने पोते और नातियों को पढ़ते देखकर प्रेरणा मिली। दो जून को वे पास ही स्थित एक पहल संस्था की पाठशाला में पहुंच गईं और बोलीं, हमें पढ़ना है। पाठशाला के शिक्षक पहले तो चौंक गए फिर उनसे दूसरे दिन आने के लिए कहा। दूसरे दिन वे सबसे पहले पाठशाला पहुंचीं। अब दोनों सहेलियां कागज पर हस्ताक्षर करने से लेकर घर का सामान्य हिसाब खुद करने लगी हैं। घर में रात में जब सभी लोग सो जाते हैं, तो इंद्रावती और मंजू कॉपी में हर रोज पहाड़े लिखती हैं। हिंदी के अक्षरों से शब्द बनाती हैं।